नई दिल्ली।अमेरिका और चीन के रिश्तों में दोबारा तल्खी बढ़ी है।ऐसा तब हुआ जब अमेरिका ने चीन की कई दिग्गज कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।इनमें बीवाईडी, अलीबाबा और बायडू शामिल हैं।इन पर वॉशिंगटन ने चीनी सेना को समर्थन देने का आरोप लगाया है।चीन ने अमेरिका के इस कदम की निंदा की है।साथ ही जवाबी एक्शन की चेतावनी दी है।
बता दें कि अमेरिका ने सोमवार को उन चीनी कंपनियों की एक अपडेटेड लिस्ट जारी की,जिनके बारे में उसका मानना है कि वे देश की सेना की मदद कर रही हैं।इनमें ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनी अलीबाबा,सर्च इंजन प्रोवाइडर बायडू और इलेक्ट्रिक गाड़ी बनाने वाली कंपनी BYD शामिल हैं।
हाल में ट्रंप और शी की हुई थी मुलाकात
अमेरिकी रक्षा विभाग ने ये नाम तब जारी किए,जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी।दोनों पक्ष आपसी रिश्तों में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।चीन ने मंगलवार को कहा कि वह कई चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने के अमेरिका के फैसले का कड़ा विरोध करता है।बता दें कि पेंटागन का यह नया अपडेट सोमवार को आया। इससे कुछ महीने पहले उसने लिस्ट का एक पुराना वर्जन जारी किया था। फिर बिना कोई कारण बताए उसे अचानक वापस ले लिया था।
चीन ने दी अमेरिका को चेतावनी
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने अमेरिका के इस रवैये की आलोचना की।लिन ने कहा कि चीन ने हमेशा और मजबूती से अमेरिका की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को सामान्य रूप से लागू करने और चीनी कंपनियों को अनुचित तरीके से दबाने का विरोध किया है।लिन ने अमेरिका से अपनी गलत कार्यप्रणाली को सुधारने की भी अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि बीजिंग चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों की मजबूती से रक्षा करने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है।
संशोधित ब्लैकलिस्ट में 80 कंपनियां और उनकी सहायक कंपनियां शामिल
संशोधित ब्लैकलिस्ट में 80 कंपनियां और उनकी सहायक कंपनियां शामिल हैं।यह लिस्ट काफी हद तक उस वर्जन जैसी ही है,जिसे फरवरी में कुछ समय के लिए जारी किया गया था।हालांकि मेमोरी चिप बनाने वाली दो कंपनियों को अब फिर से शामिल कर लिया गया है।इन्हें पहले हटा दिया गया था।ये कंपनियां हैं चांगक्सिन मेमोरी टेक्नोलॉजीज और यांग्त्जी मेमोरी टेक्नोलॉजीज।
दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में टक्कर का संकेत
पेंटागन का यह कदम दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच रिश्तों में आई नई खटास को दिखाता है।इन दोनों देशों के नेताओं ने पिछले महीने बीजिंग में एक अहम शिखर सम्मेलन किया था।उस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश की थी।ट्रंप ने शी को सितंबर में वॉशिंगटन आने का न्योता दिया है।
अलीबाबा और बीवाईडी की यह आई प्रतिक्रिया
अमेरिकी रक्षा विभाग की नई लिस्ट में चीन की कुछ बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं,जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम करती हैं,जैसे अलीबाबा,बायडू और टेनसेंट।टेनसेंट को पहले ही ब्लैकलिस्ट में शामिल किया जा चुका था।अलीबाबा ने लिस्ट में शामिल किए जाने को एक गलती बताया,जबकि बायडू ने सोशल मीडिया पर कहा कि उसे लिस्ट में शामिल करने का कोई ठोस कारण नहीं है।इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली बड़ी कंपनी BYD को भी लिस्ट में शामिल किया गया। कंपनी ने मंगलवार को हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका के इस फैसले का कोई आधार नहीं है।
आगे के संकेत नहीं अच्छे
इन फैसलों का कई कंपनियों पर तुरंत कोई कानूनी असर नहीं पड़ेगा,लेकिन इसे ऐसे कदम के तौर पर देखा जा रहा है,जिसके बाद और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है।
लिस्ट में शामिल अन्य कंपनियों में फार्मास्युटिकल कंपनी वूक्सी ऐपटेक और स्टार्ट-अप यूनिट्री शामिल हैं,जो ह्यूमनॉइड रोबोट बनाती है। WuXi AppTec के एक प्रवक्ता ने AFP को बताया कि उन्हें शामिल करना साफ तौर पर एक गलती थी।उन्होंने आगे कहा कि कंपनी किसी भी चीनी सेना या सरकारी संस्था के मालिकाना हक या नियंत्रण में नहीं है और न ही उनसे जुड़ी है। न ही वह सेना को कोई सेवा देती है।