आखिर कब सुधरेगा ये सिस्टम,झांसी मेडिकल काॅलेज अग्निकांड ने याद दिलाए ये पुराने दर्द


आखिर कब सुधरेगा ये सिस्टम,झांसी मेडिकल काॅलेज अग्निकांड ने याद दिलाए ये पुराने दर्द

मनोज बिसारिया | 16 Nov 2024

 

लखनऊ।उत्तर प्रदेश के झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार रात आग लगने की घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।इस दर्दनाक हादसे में 10 मासूम बच्चों की मौत हो गई है।शुरुआती जांच में सिस्टम की नाकामी सामने आई है।जांच में पता चला है कि मेडिकल काॅलेज में लगे अग्निशामक यंत्र चार साल पहले ही एक्सपायर हो चुके थे,लेकिन इन्हें बदला नहीं गया था।सुरक्षा अलार्म भी काम नहीं कर रहे थे।बताया जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी।

 

याद दिलाए पुराने जख्म

 

पिछले कुछ सालों में देश के कई अस्पतालों में ऐसे हादसे हुए हैं।जहां अस्पताल में लगी आग से मरीजों की मौत हो गई। इन हादसों ने हर बार सिस्टम की पोल खोली है। बड़े दुख की बात है कि इन हादसों से कोई सबक नहीं लिया गया और सिस्टम की लापरवाही का सिलसिला अभी भी जारी है,जिसकी कीमत मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।

 

कब-कब हुए ऐसे हादसे 

 

2 फरवरी, 2010 में हैदराबाद के सोमाजीगुडा के पार्क हेल्थकेयर अस्पताल में भीषण आग लगने से दो नर्सों समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी,जबकि इस हादसे में 38 अन्य घायल हुए थे।जांच में पाया गया था कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा तंत्र मौजूद नहीं था,जिससे आग पर काबू नहीं पाया जा सका और इतना बड़ा हादसा हो गया।

 

8 दिसंबर, 2016 में विजयवाड़ा के सूर्यरावपेट के नक्कल रोड स्थित श्रीदेवी आई हॉस्पिटल के यूपीएस यूनिट में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी।आग की चपेट में आकर दवा,मशीनरी और फर्नीचर समेत लगभग 12 लाख रुपये की संपत्ति जल गई।इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था।

 

2 जनवरी, 2017 में विजयवाड़ा के सेंटिनी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के यूपीएस रूम में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग लगने से लोग इमारत के अंदर फंस गए थे। धुआं बाहर निकालने के लिए शीशों को तोड़ा गया था और करीब 50 मरीजों को बाहर निकाला गया था।इस घटना में लाखों का नुकसान हुआ था।

 

3 मई, 2018 में गुंटूर सरकारी अस्पताल में ICU में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी।घटना के समय करीब 12 मरीजों का इलाज किया जा रहा।अस्पताल के स्टाफ ने समय रहते आग बुझा दी थी और मरीजों का जान बचाई थी।इस हादसे में कोई भी हताहत नहीं हुआ था।

 

27 सितंबर, 2018 में उत्तरी तेलंगाना के एमजीएम अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में अचानक से आग लग गई थी। वार्ड के अंदर करीब 23 नवजात शिशु थे।आग लगने के बाद एसी से धुआं निकलने लगा, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। तुरंत नवजात शिशुओं को वार्ड से बाहर निकाला गया था। इस हादसे में 23 बच्चे बाल-बाल बच गए थे।

 

8 अगस्त, 2019 में हैदराबाद के गांधी अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित पोस्ट-ऑपरेटिव पीडियाट्रिक वार्ड में आग लग गई थी।इस हादसे में पूरा वार्ड जल गया था।इस हादसे में कोई भी घायल नहीं हुआ था।हालांकि संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था।

 

मई, 2024 में मई महीने में दिल्ली के विवेक विहार बेबी केयर सेंटर में आग लग गई थी।इस हादसे में सात नवजात बच्चे जलकर मर गए थे।घटना के वक्त 12 बच्चे अस्पताल में भर्ती थे।


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