11 महीने पहले सेना में भर्ती हुए थे विशाल कुमार,चाइना बॉर्डर हुए शहीद,नम आंखों से लोगों ने दी अंतिम विदाई


11 महीने पहले सेना में भर्ती हुए थे विशाल कुमार,चाइना बॉर्डर हुए शहीद,नम आंखों से लोगों ने दी अंतिम विदाई

धनंजय सिंह | 03 Apr 2025

 

अलीगढ़।देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत विशाल कुमार डागर का पार्थिव शरीर बुधवार को जब उनके पैतृक गांव खेड़िया बुजुर्ग पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन हो गया,पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई,विशाल के अंतिम दर्शन के लिए लोगों सैलाब उमड़ पड़ा,हर किसी की आंखें नम थीं,लेकिन गर्व भी था कि उनके गांव का बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हुआ,लोगों ने भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाकर भारत माता के वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

विशाल कुमार डागर भारतीय सेना में महज 11 महीने पहले भर्ती हुए थे। विशाल अपने पहले ही प्रयास में सेना में शामिल होकर देश की सेवा का सपना पूरा करने में सफल रहे थे। विशाल की पहली पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश में चाइना बॉर्डर पर थी।बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान विशाल के सिर पर चोट लग गई,जिससे हालात गंभीर हो गई। विशाल की शहादत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची तो मातम छा गया। 

विशाल के पिता जयप्रकाश सिंह को सेना के अधिकारियों ने बेटे की शहादत की सूचना दी। विशाल के शहादत की खबर सुनते ही पूरा परिवार शोक में डूब गया।मां का रो-रोकर बुरा हाल था, उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। विशाल का छोटा भाई रवि भी भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहा है।विशाल के परिवार में उनके माता-पिता, दो भाई और एक बहन हैं। परिवार को अपने बेटे की बहादुरी पर गर्व है, लेकिन बेटे के जाने का असहनीय दर्द भी है।

बुधवार को विशाल कुमार का पार्थिव शरीर जैसे ही खेड़िया बुजुर्ग गांव पहुंचा तो पूरा गांव उमड़ पड़ा,हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा।सेना के जवानों ने तिरंगे में लिपटे विशाल के पार्थिव शरीर को सलामी दी।गांव के श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ विशाल कुमार का अंतिम संस्कार किया गया।सेना के जवानों ने सलामी दी और तिरंगे में लिपटे विशाल को अंतिम विदाई दी।

एसडीएम खैर महिमा,पुलिस के आला अधिकारी और हजारों की संख्या में ग्रामीण इस मौके पर मौजूद रहे।विशाल चार महीने पहले ही छुट्टी पर घर आए थे,उन्होंने परिवार के साथ समय बिताया और फिर ड्यूटी पर लौट गए।पांच दिन पहले ही विशाल ने परिवार से फोन पर बात की थी। किसी को नहीं पता था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।विशाल की शहादत पर पूरे गांव को गर्व है,लेकिन उनके जाने का गम भी हर किसी की आंखों में साफ झलक रहा था।


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