यमुना नदी में कूदी लड़की,शिवभक्त संदीप बिसारिया ने बचाई जान


यमुना नदी में कूदी लड़की,शिवभक्त संदीप बिसारिया ने बचाई जान

मनोज बिसारिया | 03 Apr 2025

 

मनोज बिसारिया

नई दिल्ली। बात 3 अप्रैल 1983 की है।उन दिनों हम न‌ई दिल्ली की लोदी कॉलनी में रहा करते थे।शाम को आईटीओ पुलिस हेडक्वॉर्टर्स से फ़ोन आया कि संदीप बिसारिया से बात करनी है,कमिश्नर साहब मिलना चाहते हैं।वह ज़माना लैंडलाइन फ़ोन का था,ऐसे में किसी से सीधे संपर्क करना कई बार मुश्किल हो जाता था।अब पुलिस मुख्यालय से भाई के लिए फ़ोन आना समझ नहीं आया कि क्या बात हो गई,जिस पर पुलिस कमिश्नर मिलना चाहते हैं।भला ऐसा क्या कर दिया।अब जितने भी संपर्क में लोग थे,उन्हें फ़ोन करके खंगाला गया।

थोड़ी देर बाद घर पर टाइम्स ऑफ इंडिया,हिंदुस्तान,पंजाब केसरी,अमर उजाला जैसे कई प्रतिष्ठित अख़बारों के रिपोर्टर घर आ गए।उनके माध्यम से पता चला कि 3 अप्रैल को दिन में कोई लड़की,जो किसी गुप्ता परिवार से थी वो आत्महत्या करने के लिए आईटीओ की यमुना नदी में कूद पड़ी थी,जिसे मेरे भाई संदीप बिसारिया ने अपनी जान पर खेलकर बचाया था।

किस्सा कुछ यूं था कि उस लड़की की कुछ दिनों बाद शादी होने वाली थी,लेकिन शादी से कुछ दिन पहले ही उसके घर में चोरी हो गई,जिसमें चोर परिवार का सारा क़ीमती सामान और ज़ेवर आदि चुराकर ले गए थे।ऐसे में लड़के वालों ने शादी तोड़ दी।निराश लड़की ने आत्महत्या का रास्ता चुना और घटना वाले दिन उस लड़की ने आईटीओ के पुल से यमुना नदी में छलांग लगा दी।संदीप बिसारिया उस दिन अपने चचेरे भाई के साथ अपने स्कूटर से आईटीओ पुल से गुज़र रहे थे।जब संसद ने देखा कि सड़क पर बड़ा जाम लगा है,किसी लड़की ने पानी में छलांग लगा दी है।पुल पर खड़े लोग डूबती हुई लड़की को देख रहे थे,लेकिन नदी की उफनती लहरों के बीच किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि कोई आगे जाकर लड़की को बचाने की कोशिश करे।करता भी कैसे,लोग पुल पर खड़े थे,लड़की नीचे नदी में डूब रही थी।

मैं बता दूं कि अपने स्कूली दिनों में मेरे भाई संदीप बिसारिया को तैराक़ी- प्रतियोगिताओं में कई पुरस्कार मिले थे।शायद ये तैराकी का जोश ही था कि भाई ने आनन-फानन में पुल के ऊपर से ही यमुना नदी में छलांग लगा दी।लोग विस्मय से देख रहे थे,बिल्कुल फ़िल्मी सीन था।लड़की तब तक नदी के भंवर में फंस गई थी। यमुना नदी का बहाव तेज़ था,भाई ने लड़की को उसके बालों से पकड़ा और धीरे-धीरे उसे किनारे पर लाने की कोशिश करता रहा। कई बार बहाव में लड़की अलग़ बह जाती,लेकिन बड़ी मुश्किल से उसे किनारे लाया गया। तब तक पुलिस और फ़ायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी आ पहुंची थी। 

 उसके बाद के कई दिन संदीप बिसारिया देश के हर छोटे-बड़े अख़बार की सुर्ख़ियों में छाए रहे।पुलिस की ओर से वीरता प्रमाणपत्र और कुछ नक़द धनराशि दी गई।रेडियो में इंटरव्यू चले और उन दिनों दूरदर्शन पर श्री विनोद दुआ का एक साप्ताहिक कार्यक्रम आया करता था,उसमें भी भाई का इंटरव्यू दिखाया गया।अच्छी बात ये रही कि उस इंटरव्यू को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भी देखा और पीएमओ द्वारा भाई को विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया। यहां तक कि पुलिस में भी भर्ती किए जाने का ऑफ़र दिया गया।

आज भी 3 अप्रैल है। आज भाई हमारे बीच नहीं है,लेकिन सोचता हूं आज जबकि लोगों के पास मोबाइल जैसी व्यवस्था है। किसी दुर्घटना होने पर लोग केवल वीडियो बनाते रह जाते हैं, किंतु मदद करने कितने लोग आगे बढ़ते हैं। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को यदि तुरंत अस्पताल ले जाया जाए तो बहुतों की जान बच भी सकती है।आज का दिन कुछ पुरानी स्मृतियों को ताज़ा कर देता है, सोचा कि ये क़िस्सा आप सबके साथ भी बांटू, बस यूं ही।


add

अपडेट न्यूज


भारत से सुपरहिट
Beautiful cake stands from Ellementry

Ellementry

© Copyright 2019 | Vanik Times. All rights reserved