दिल्ली में नहीं चलेगी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी,रेखा सरकार ने पेश किया फीस नियंत्रण विधेयक, जानें क्या होंगे फायदे


दिल्ली में नहीं चलेगी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी,रेखा सरकार ने पेश किया फीस नियंत्रण विधेयक, जानें क्या होंगे फायदे

मनोज बिसारिया | 04 Aug 2025

 

नई दिल्ली।रेखा गुप्ता सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए एक नया विधेयक सदन में पेश किया है।सोमवार को शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सदन में दिल्ली स्कूल शिक्षा विधेयक 2025 पेश किया।इसका उद्देश्य शिक्षा को बिजनेस बनने से रोकना और स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसना है।

राजधानी में फीस वृद्धि के खिलाफ बढ़ते अभिभावकों का विरोध और कोर्ट केस के बाद दिल्ली सरकार ने यह कदम उठाया है। इस बिल में फीस वृद्धि पर सरकारी नियंत्रण, उल्लंघन पर जुर्माना और पैरेंट्स के अधिकारों की सुरक्षा जैसे प्रावधान हैं।

सदन में बिल पेश करते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि शिक्षा बेचने की चीज नहीं है।यह बिल शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने के लिए लाया गया है।हम उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए यह बिल ला रहे हैं जो शिक्षा को बेच रहे हैं।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा माफिया के खिलाफ मजबूती से बिल लेकर आई है। अभिभावकों को राहत मिलेगी और शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता आ सकेगी। यदि यह बिल पारित हो जाता है तो सरकार को निजी स्कूलों पर जुर्माना लगाने,उन पर निगरानी रखने का अधिकार मिल जाएगा।

दिल्ली में कई प्राइवेट स्कूलों ने 2025-26 में फीस में 30 से 45 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि की।इससे परेशान होकर अभिभावकों ने 20 जुलाई 2025 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया,उनका आरोप था कि स्कूल मुनाफा कमाने वाली कंपनी की तरह काम कर रहे हैं। इसके अलावा एक मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा,जिसमें फीस न देने पर बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया था।

बता दें कि नए बिल के पास होने के बाद कोई भी प्राइवेट स्कूलों को फीस वृद्धि करने के लिए दिल्ली सरकार की अनुमति लेनी होगी।साथ ही स्कूलों की फीस का पूरा हिसाब-किताब देना होगा।नियमों का उल्लघंन करने पर जुर्माना लग सकता है।साथ ही स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है,इसके अतिरिक्त बिल के पास होने के बाद अभिभावकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए एक सिस्टम बनाया जाएगा। जहां वे आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।यह बिल दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों और पैरेंट्स के बीच चल रही तनातनी के बीच आया है। इस बिल को लेकर अभिभाकों ने स्वागत किया है। जबकि कुछ स्कूलों का कहना है कि अच्छी सुविधाएं और स्टाफ को सैलरी देने के लिए फीस में बदलाव करना भी जरूरी है।


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