हाथरस।हाथरस का रोली और चंदन संगम नगरी के माघ मेले में श्रद्धालुओं के माथे की शोभा बढ़ा रहा है।हाथरस शहर में 26 इकाइयां आकर्षक पैकिंग के साथ इसका उत्पादन कर रही हैं।इसका सालाना कारोबार लगभग 35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।मथुरा,वृंदावन और गोवर्धन के जरिये यह देश के कोने-कोने में जा रहा है।हींग और रंग-गुलाल के बाद हाथरस इस कारोबार पर भी अपनी पकड़ बना रहा है।
रोली-चंदन कारोबारी खेमेश वार्ष्णेय का कहना है कि पर्व और त्योहार पर उत्पादन बढ़ जाता है।माघ मेला,महाशिवरात्रि, होली और नवरात्रि में माल की आपूर्ति बाहर जाती है। वृंदावन-गोवर्धन के जरिये माल देश के कोने-कोने तक पहुंच रहा है।मथुरा,प्रयागराज,वाराणासी,उज्जैन,अयोध्या आदि धार्मिक स्थलों में रोली चंदन जाता है।
पूजा सामग्री कारोबारी मनोज अग्रवाल का कहना है,शहर में रोली व चंदन का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। खास मौकों पर मांग ज्यादा होती है। माघ मेले के लिए आपूर्ति जारी है।अब नवरात्र की तैयारी की जा रही है।ऑर्डर पर माल बनाया जाता है। करीब तीन हजार लोगों को इस कारोबार से रोजगार मिल रहा है।
बढ़ता है माघ मेले से कारोबार
बता दें कि त्योहार और पर्व से पहले रोली और चंदन का कारोबार रफ्तार पकड़ लेता है।संगम नगरी में तीन जनवरी से माघ मेला शुरू हुआ जो 15 फरवरी तक चलेगा।माघ मेले में लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगे।इनके पूजन में प्रयोग होने वाला चंदन और रोली हाथरस का होगा। यूं तो साल भर यह कारोबार चलता है,लेकिन माघ मेला, महाशिवरात्रि,होली और चैत्र नवरात्रि में इसके उत्पादन में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हो जाती है।
श्रद्धालुओं को लुभा रही आकर्षक पैकिंग
रोली और चंदन का कारोबार अब मुख्य रूप से आकर्षक पैकिंग पर निर्भर हो चुका है,जो जितना बेहतर दिखेगा उतना ही मार्केट में पकड़ बना पाएगा। इसके लिए हर इकाई पैकिंग पर ध्यान दे रही है। यहां तीन प्रकार के चंदन का उत्पादन हो रहा है,इनमें पाउडर,दानेदार व गीला चंदन है। तीनों के लिए अलग-अलग प्रकार की डिब्बियां बनती हैं। रोली दो ग्राम से लेकर आधा किलो तक पैकेट में पैक की जा रही है।
वृंदावन-गोवर्धन से पूरे देश में फैला व्यापार
शहर में रोली-चंदन बना रहीं इकाइयां वृंदावन और गोवर्धन के जरिये व्यापार कर रही हैं।जहां देश के कोने-कोने से व्यापारी पहुंचते है।शहर से तैयार माल थोक में मथुरा पहुंचता है। मथुरा से वाराणसी,प्रयागराज,अयोध्या आदि शहरों में पहुंचाया जाता है।बड़े कारोबारी सीधे दिल्ली,महाराष्ट्र,गुजरात,ओडीशा और दक्षिणी प्रांतों तक अपना माल पहुंचा रहे हैं। दिल्ली से कुछ माल निर्यात भी किया जा रहा है।