यूपी तक पहुंची वेनेजुएला संकट की तपिश,दांव पर 4 हजार करोड़ का विदेशी व्यापार,बढ़ी निर्यातकों की धड़कनें


यूपी तक पहुंची वेनेजुएला संकट की तपिश,दांव पर 4 हजार करोड़ का विदेशी व्यापार,बढ़ी निर्यातकों की धड़कनें

धनंजय सिंह | 06 Jan 2026

 

कानपुर।दक्षिण अमेरिका में एक बार फिर भू सियासत का पारा चढ़ गया है।वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद उपजे हालात अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं,इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के विदेश कारोबार पर पड़ने की संभावना है।भारतीय निर्यात परिषद (फियो) की रिपोर्ट ने भी इसे व्यापारिक दृष्टिकोण से गंभीर संकट माना है। रिपोर्ट के मुताबिक भले ही वेनेजुएला से उत्तर प्रदेश का सीधा कारोबार बहुत सीमित है,लेकिन उसी रास्ते से जुड़े अन्य दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ सालों से चल रहे व्यापार पर संकट के बादल छाए हैं।

उत्तर प्रदेश का गुयाना,ब्राजील,कोलंबिया समेत दक्षिण अमेरिका के आधा दर्जन देशों से सालाना लगभग चार हजार करोड़ रुपये का कारोबार है।इन देशों में यूपी से लेदर उत्पाद, रेडीमेड गारमेंट,कृषि आधारित वस्तुएं और दवाओं की जबरदस्त मांग है।कानपुर,आगरा,नोएडा,गाजियाबाद, मुरादाबाद जैसे औद्योगिक शहर इस व्यापार की रीढ़ माने जाते हैं।अकेले कानपुर से ही लगभग 250 करोड़ रुपये का निर्यात दक्षिण अमेरिकी बाजारों में होता है।मौजूदा हालात को देखते हुए इन शहरों के निर्यातक अलर्ट मोड पर आ गए हैं।

फियो के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक वेनेजुएला संकट अगर लंबा खिंचता है तो समुद्री और लॉजिस्टिक मार्गों पर गंभीर असर पड़ सकता है। वेनेजुएला के रास्ते जिन देशों से वर्षों से व्यापार होता आ रहा है, वहां माल की आवाजाही में बाधाएं बढ़ सकती हैं।सबसे बड़ा खतरा भुगतान प्रणाली को लेकर है।अमेरिकी प्रतिबंधों और वित्तीय सख्ती के चलते बैंकों के माध्यम से भुगतान में देरी,एलसी (लेटर ऑफ क्रेडिट) खोलने में दिक्कत और डॉलर ट्रांजेक्शन पर अतिरिक्त जांच जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। तनाव बढ़ने की स्थिति में नए ऑर्डर रुक सकते हैं,वहीं शिपिंग बीमा की लागत भी तेजी से बढ़ेगी। बीमा कंपनियां जोखिम बढ़ने का हवाला देकर प्रीमियम महंगा कर सकती हैं, जिससे निर्यात की कुल लागत बढ़ेगी और मुनाफा घटेगा। खासतौर पर छोटे और मध्यम निर्यातकों पर इसका सबसे ज्यादा दबाव पड़ने की आशंका है।

लघु उद्योग भारती महिला विंग की अध्यक्ष प्रेरणा वर्मा कहती हैं कि दक्षिण अमेरिकी बाजार उत्तर प्रदेश के लिए लंबे समय से भरोसेमंद रहे हैं।ऐसे में किसी भी तरह की अस्थिरता प्रदेश के निर्यात ग्रोथ को झटका दे सकती है।निर्यातक वैकल्पिक रूट,नए भुगतान विकल्प और अन्य बाजारों की तलाश में जुट गए हैं। प्रेरणा का कहना है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।

सीएलई के पूर्व रीजनल चेयरमैन जावेद इकबाल कहते हैं कि वेनेजुएला संकट ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक राजनीति में उठने वाली हलचल का असर स्थानीय उद्योग और कारोबार तक पहुंचता है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और यूपी के निर्यातकों को इस संकट से उबरने में कितना समय लगता है।

वेनेजुएला संकट से ये परेशानियां,भुगतान प्रणाली पर संकट,शिपिंग और लॉजिस्टिक बाधाएं,नए ऑर्डर रोकने की आशंका,बाजार हिस्सेदारी खिसकने का डर और शिपिंग बीमा महंगा होने का खतरा।


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