गणतंत्र दिवस से पहले 7 दिन चलेगी चीलों की चिकन पार्टी,आसमान में चीलों को दूर रखने के लिए 15 जनवरी से शुरू होगा विशेष दावत अभियान,रेखा सरकार ने किए खास इंतजाम


गणतंत्र दिवस से पहले 7 दिन चलेगी चीलों की चिकन पार्टी,आसमान में चीलों को दूर रखने के लिए 15 जनवरी से शुरू होगा विशेष दावत अभियान,रेखा सरकार ने किए खास इंतजाम

मनोज बिसारिया | 09 Jan 2026

 

नई दिल्ली।गणतंत्र दिवस के मौके पर आसमान में लड़ाकू विमानों की गर्जना और हैरतअंगेज करतबों के बीच कोई खलल न पड़े,इसके लिए रेखा गुप्ता सरकार और वायुसेना ने एक अनोखा प्लान तैयार किया है।इस बार आसमान के असली राजा चीलों को विमानों के रास्ते से दूर रखने के लिए उन्हें दावत दी जाएगी। 26 जनवरी की परेड में विमानों की सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली वन विभाग 1,275 किलो बिना हड्डी वाला चिकन का इस्तेमाल करेगा।

बता दें कि हवाई शो के दौरान जेट और अन्य लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं।इस दौरान इन पक्षियों,विशेष तौर पर काली चील के आने से करतब दिखाने में परेशानी हो सकती है।साथ ही खतरा भी पैदा हो सकता है। इसलिए इन पक्षियों की आवाजाही को मैनेज करने और उन्हें विमानों के रास्ते से दूर रखने के लिए वन विभाग द्वारा 1275 किलोग्राम बिना हड्डी वाले चिकन का इस्तेमाल करते हुए उसे आसमान से गिराया जाएगा।खास बात यह है कि इस साल पहली बार भैंस के मांस की जगह चिकन का इस्तेमाल किया जा रहा है। 15 से 26 जनवरी के बीच शहर के 20 अलग-अलग संवेदनशील इलाकों में यह एक्सरसाइज की जाएगी।

इस बारे में जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मांस फेंकने की यह कवायद हर साल एयर शो से पहले भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर की जाती है,जिसका मकसद पक्षियों को विमानों से टकराने से रोकना होता है। अधिकारी ने बताया कि एयर शो के दौरान विमान कम ऊंचाई पर उड़ते हैं,ऐसे में ये पक्षी इन विमानों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। अधिकारी ने बताया कि इससे पहले तक इस काम के लिए भैंसे के मांस का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन इस साल से इसमें बदलाव करते हुए वन विभाग ने चिकन मांस के इस्तेमाल करने का फैसला किया है।

अधिकारी ने बताया कि यह प्रैक्टिस 15 जनवरी से 26 जनवरी के बीच शहर भर में 20 स्थानों पर की जाएगी,जिसमें लाल किला और जामा मस्जिद जैसे संवेदनशील इलाके भी शामिल हैं,जहां आमतौर पर बड़ी संख्या में चीलें देखी जाती हैं। अधिकारी ने बताया कि अभ्यास के लिए चुनी गई अन्य जगहों में मंडी हाउस,दिल्ली गेट और मौलाना आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के पास के इलाके भी शामिल हैं। हर जगह लगभग 20 किलोग्राम मांस का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सभी जगहों पर हर दिन इस्तेमाल होने वाले चिकन की कुल मात्रा लगभग 400 किलोग्राम हो जाएगी।

अधिकारी ने बताया कि इन जगहों की पहचान हर साल पक्षियों की आवाजाही के पैटर्न के आधार पर की जाती है। लाल किला और जामा मस्जिद जैसे इलाकों में चीलों की संख्या ज़्यादा होती है, जिससे पक्षियों के उड़ान मार्ग में भटकने का खतरा बढ़ जाता है। उन्हें तय जगहों पर खाना खिलाकर, हम यह सुनिश्चित करते हैं कि वे एयर शो के रास्ते से दूर रहें और उन्हें पर्याप्त खाना भी मिलता रहे।

इस प्रैक्टिस की प्रक्रिया समझाते हुए अधिकारी ने बताया कि इसमें तय जगहों पर हवा में चिकन मांस के छोटे-छोटे टुकड़े फेंकना शामिल है ताकि पक्षी कम ऊंचाई पर व्यस्त रहें और हवाई मार्गों की ओर न उड़ें।अधिकारी ने बताया,यह एक्सरसाइज इवेंट से लगभग 15 दिन पहले बार-बार की जाती है, ताकि पक्षी खाने के पैटर्न के आदी हो जाएं। इसका मकसद यह पक्का करना है कि गणतंत्र दिवस एयर शो के दौरान, पक्षी फ्लाइट पाथ में न आएं और विमानों के लिए कोई खतरा पैदा न करें।

अधिकारी ने बताया कि मीट की सप्लाई 15 जनवरी से 25 जनवरी के बीच सात दिनों में की जाएगी,जिसमें 15, 18, 19, 20, 23 और 25 जनवरी को हर दिन 170 किलोग्राम और 22 जनवरी को 255 किलोग्राम की ज़्यादा मात्रा में सप्लाई होगी।सभी खेप वज़ीराबाद में वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर में पहुंचाई जाएंगी।हर जगह लगभग 20 किलोग्राम मीट का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सभी जगहों पर हर दिन इस्तेमाल होने वाले मीट की कुल मात्रा 200 से 400 किलोग्राम हो जाएगी।


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