पार्वती अरगा झील में भी अठखेलियां कर रहे हजारों मील दूर से आए पक्षी,12 हजार हेक्टेयर में फैला है परिंदों का संसार


पार्वती अरगा झील में भी अठखेलियां कर रहे हजारों मील दूर से आए पक्षी,12 हजार हेक्टेयर में फैला है परिंदों का संसार

धनंजय सिंह | 17 Jan 2026

 

गोंडा।उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज ब्लॉक में पार्वती अरगा पक्षी विहार इन दिनों पक्षियों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है।प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र देश-विदेश से आने वाले पक्षियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान कर रहा है।यह प्रकृति प्रेमियों के लिए जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर यह झील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट के रूप में दर्ज है।कड़ाके की ठंड के बीच यहां लेह-लद्दाख,साइबेरिया,मंगोलिया और तिब्बत से बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आ चुके हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ समय पहले राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में पर्यटन के लिहाज से इस झील को बहुत महत्वपूर्ण बताया था। 

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर साइट के तौर दर्ज इस पक्षी विहार के चारों तरफ एक किलोमीटर की झील में इको सेंसटिव जोन घोषित गया है।यहां सर्द मौसम में एशिया और तिब्बत से लंबी दूरी तय कर आने वाले पक्षी पर्यटकों का मनोरंजन करने के साथ ही पक्षी झील की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। पार्वती अरगा पक्षी विहार में प्रवासी पक्षियों के सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा। यहां प्रवासी पक्षी 15 दिसम्बर से आना शुरू करते हैं। 15 मार्च तक विदेशी परिंदे यहां से लौट जाते हैं ।

12 हजार हेक्टेयर में फैला है परिंदों का संसार

लगभग 12 हजार हेक्टेयर में फैली यह झील नौ गांवों से होकर गुजरती है,जबकि इसके आसपास के 19 गांवों को इको सेंसटिव जोन घोषित किया गया है। 15 दिसंबर से शुरू होने वाला इन मेहमान पक्षियों का आगमन 15 मार्च तक जारी रहता है।झील में सारस के जोड़ों के साथ-साथ कई दुर्लभ प्रजातियां देखी जा रही हैं।ब्राउन हेडेड गल (भूरा सिर ढोमरा), ब्लैक हेडेड गल (काला सिर ढोमरा), सुर्खाब, नीलसर, लालसर, जल कुकरी, बेतुल, कामनकूट (ठेकड़ी) और सफेद गैरी।

हजारों किलोमीटर दूर से आए हैं परिंदे 

विशेषज्ञों के अनुसार साइबेरिया और तिब्बत जैसे इलाकों में तापमान शून्य से बहुत नीचे जाने पर वहां इन पक्षियों का जीवित रहना मुश्किल हो जाता है। जीवन रक्षा और अनुकूल वातावरण की तलाश में ये पक्षी लंबी दूरी तय कर गोंडा की इस सुरक्षित झील तक पहुंचते हैं।

चुनौतियां और विकास की योजना

केंद्रीय पर्यावरण राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह इस झील के कायाकल्प के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। अरगा झील को सरयू नहर से जोड़ने की योजना पर काम शुरू हो चुका है ताकि झील में पानी की कमी के संकट को दूर किया जा सके। वन विभाग के अनुसार वर्तमान में पक्षियों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जल्द ही उनकी वैज्ञानिक गणना भी शुरू की जाएगी।

जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र

पार्वती अरगा पक्षी विहार में पक्षियों की दर्जनों प्रजातियों के साथ-साथ वनस्पतियों की भी समृद्ध विविधता पाई जाती है। यहां पौधों की 73 परिवारों से संबंधित लगभग 283 प्रजातियां और एक उप-प्रजाति दर्ज की गई है। यही कारण है कि यह क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।


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