एलजी वीके सक्सेना को अदालत से मिली बड़ी राहत,26 साल पुराने मामले में किया बरी


एलजी वीके सक्सेना को अदालत से मिली बड़ी राहत,26 साल पुराने मामले में किया बरी

मनोज बिसारिया | 30 Jan 2026

 

नई दिल्ली।दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को दो दशक से भी ज्यादा पुराने एक मानहानि मामले में बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को साकेत कोर्ट ने एलजी को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। ये याचिका नर्मदा बचाओ आंदोलन से पहचान बनाने वालीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा साल 2000 में दायर की गई थी।ये आदेश साकेत कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) राघव शर्मा ने पारित किया है।

इससे पहले मार्च 2025 में अदालत ने मामले में मेधा पाटकर की अतिरिक्त गवाहों की जांच करने की अर्जी को गैर जरूरी बताते हुए खारिज कर दिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि यह जानबूझकर मुकदमे में देरी करने के लिए की गई कोशिश है, और इसकी कोई वास्तविक जरूरत नहीं है।

मेधा पाटकर ने ये मानहानि का याचिका साल 2000 में एक न्यूज़पेपर में प्रकाशित विज्ञापन को लेकर किया था।ये विज्ञापन नागरिक स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय परिषद (एनसीसीएल) के द्वारा लगवाई गई थी।हालांकि विज्ञापन गुजरात के सरदार सरोवर डैम को सपोर्ट करती थी,लेकिन पाटकर के नर्मदा बचाओ आंदोलन के ख़िलाफ़ थी।इस दौरान एनसीसीएल के प्रेसिडेंट उपराज्यपाल सक्सेना थे। विज्ञापन का टाइटल था ट्रू फेस ऑफ मेधा पाटकर एंड उसकी नर्मदा बचाओ आंदोलन।

सक्सेना ने भी साल 2001 में मेधा पाटकर के खिलाफ एक टीवी चैनल पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और मानहानिकारक प्रेस बयान जारी करने के लिए दो मामले दायर किए थे,जिनमें से एक मामले में कोर्ट ने हाल ही में पाटकर को बरी किया है।

सक्सेना की याचिका पर पिछले हफ्ते 25 जनवरी को दिए अपने फैसले में दिल्ली की एक अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा दायर मानहानि के आपराधिक मामले में बरी कर दिया था। यह मामला साल 2006 में एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान पाटकर द्वारा की गई टिप्पणियों से संबंधित था। अदालत ने कहा कि सक्सेना कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को रिकॉर्ड करने वाले मूल रिकॉर्डिंग उपकरण या संपूर्ण वीडियो फुटेज को प्रस्तुत करने में विफल रहे।

शिकायत के अनुसार मेधा पाटकर ने कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर दावा किया था कि सक्सेना और उनके NGO (गैर सरकारी संगठन) NCCL को सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य संबंधी ठेके मिले थे। सक्सेना ने इस आरोप का खंडन करते हुए इसे मानहानिकारक माना था।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से पता चलता है कि पाटकर कार्यक्रम में परिचर्चा के दौरान शामिल नहीं थीं और प्रसारण के दौरान केवल उनका एक छोटा और पूर्व में रिकॉर्ड किया गया वीडियो क्लिप चलाया गया था। यह शिकायत मूल रूप से अहमदाबाद में दायर की गई थी और उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर इसे 2010 में दिल्ली स्थानांतरित किया गया था।

बता दें कि साकेत कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि तथ्यहीन आरोपों के खिलाफ कानून सख्त है और किसी भी व्यक्ति की मानहानि करने वाले आरोप बगैर प्रमाण के टिक नहीं पाएंगे।

बता दें कि बीते शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को भी आपराधिक मानहानि के एक मामले में कोर्ट ने बरी कर दिया।यह मामला दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना की ओर से दायर किया गया था।


add

अपडेट न्यूज


भारत से सुपरहिट
Beautiful cake stands from Ellementry

Ellementry

© Copyright 2019 | Vanik Times. All rights reserved