अविमुक्तेश्वारनंद को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका,शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर दायर याचिका खारिज,सुनने से किया इंकार


अविमुक्तेश्वारनंद को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका,शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर दायर याचिका खारिज,सुनने से किया इंकार

मनोज बिसारिया | 16 Feb 2026

 

नई दिल्ली।प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में मौनी अमाव्स्या के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनी ही नही।कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है।आप संबंधित ऑथारिटी को ज्ञापन दे सकते हैं। याचिकाकर्ता ने मेला प्रशासन की तरफ से अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे नोटिस को भी गलत बताया था।

सुप्रीम कोर्ट उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के माघ मेले के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और धार्मिक छात्रों के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए इस मामले को सुनने से इंकार कर दिया।यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील उज्ज्वल गौड़ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की थी।दायर जनहित याचिका में धार्मिक गुरुओं पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए थे।याचिका में यह भी कहा गया है कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) न होने और पुलिस को मिली बेलगाम विवेकाधीन शक्तियों को चुनौती दी गई है।

बता दें कि मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बटुकों के साथ संगम में शाही स्नान करने पालकी पर सवार होकर जा रहे थ। इस दौरान वहां सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें पालकी आगे न ले जाने को कहा,जिससे दोनों पक्षों की बहस शुरू हो गई।पुलिस ने लाख समझाने की कोशिश की,लेकिन न तो अविमुक्तेश्वरानंद मानें और न ही उनके शिष्य और जबरदस्ती करने लगे,इसके बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर बटुकों को रास्ते से हटाना शुरू कर दिया।हालांकि अविमुक्तेश्वरानंद ने बटुकों को पीटने का गंभीर आरोप लगाए।यहां तक की अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर भी बैठे रहे और फिर कुछ दिनों बाद माघ मेला छोड़कर चले गए।


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