नई दिल्ली।शुक्रवार को दिल्ली की साकेत कोर्ट ने एक वकील से 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में लॉरेंस बिश्नोई और 2 अन्य को बरी कर दिया है।अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ बयानों के अलावा कोई सबूत नहीं मिला है।आरोपी के अपने बयानों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता है। बता दें कि मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एफआईआर के बाद फायरिंग और रंगदारी की कॉल से जुड़ा था।दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद लॉरेंस बिश्नोई,हरेन सरपदादिया और आशीष शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
तीनों आरोपी बरी
चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) नूपुर गुप्ता ने लॉरेंस बिश्नोई,हरेन सरपदादिया और आशीष शर्मा को रंगदारी और उससे जुड़े आरोपों से बरी कर दिया।अदालत ने देखा कि शिकायतकर्ता ने धमकी के कारण फिरौती की रकम देने का आरोप नहीं लगाया था। यही नहीं चार्जशीट में रकम देने का जिक्र भी नहीं था।अदालत ने कहा कि आरोपियों पर आईपीसी की धारा 386 के तहत सजा वाले अपराध के लिए आरोप नहीं लगाया जा सकता है।
क्या लगी थी धाराएं
अदालत ने कहा कि आरोपियों के डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के अलावा रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है,जिससे उन अपराधों का पता चले जिनके लिए उन पर चार्जशीट लगाई गई थी। इसके साथ ही अदालत ने लॉरेंस बिश्नोई,हरेन सरपदादिया और आशीष शर्मा को आईपीसी की धारा 386 (किसी व्यक्ति को फिरौती के लिए धमकाना), 387 (जबरन वसूली) और धारा 120B के तहत अपराध से बरी कर दिया।
केवल मांग या धमकी देना काफी नहीं
अदालत ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन का ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी को कोई फिरौती दी गई थी। फिरौती के जुर्म के लिए डर के कारण रकम की डिलीवरी होनी जरूरी है।बिना फिरौती की डिलीवरी के केवल मांग या धमकी देना काफी नहीं है। इस मामले में शिकायतकर्ता ने सिर्फ एक अनजान नंबर से 1 करोड़ रुपये की मांग वाले कॉल आने का आरोप लगाया है।
ये दी थी शिकायत
बता दें कि इस मामले में शिकायतकर्ता रमन दीप सिंह ने सनलाइट कॉलोनी पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज कराई थी।इसमें कहा गया था कि 23-24 अप्रैल 2023 की रात को उनको एक अनजान नंबर से फोन आया था। इसमें 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी।शुरू में कॉल की अनदेखी की,लेकिन उसी नंबर से कई कॉल आने और जान से मारने की धमकी मिलने के बाद एक शिकायत दर्ज कराई।
जांच के बाद दाखिल की थी चार्जशीट
इस शिकायत के बाद पुलिस की ओर से आईपीसी की धारा 387 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जांच के बाद दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 386 और 387 के साथ धारा 120B के तहत चार्जशीट दाखिल की। एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की ओर से कहा गया कि अभियोजन पक्ष ने सभी जरूरी तत्य रिकॉर्ड पर लाए हैं। इससे पहली नजर में आरोपियों की जिम्मेदारी साबित होती है।