मिडिल ईस्ट संकट पर एस जयशंकर के बयान के बाद विपक्ष बिफरा,कहा- सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा


मिडिल ईस्ट संकट पर एस जयशंकर के बयान के बाद विपक्ष बिफरा,कहा- सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा

मनोज बिसारिया | 09 Mar 2026

 

नई दिल्ली।पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण जंग और तनाव के बीच सोमवार को राज्यसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ।विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर द्वारा क्षेत्र की स्थिति पर दिए गए आधिकारिक बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की रणनीति और चुप्पी पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस और वामपंथी दलों के नेताओं का आरोप है कि सरकार इस गंभीर भू-राजनीतिक संकट को हल्के में ले रही है।

 कांग्रेस ने कहा- बयान काफी नहीं,बहस करो

कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनिया एक बेहद तनावपूर्ण स्थिति का सामना कर रही है,जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।माथेर ने कहा,मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण तेल और ऊर्जा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हैं।इसका असर भारतीय शेयर बाजार में भी दिख रहा है,जहां सेंसेक्स और निफ्टी लगातार गिर रहे हैं। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर केवल मंत्री का बयान काफी नहीं है, संसद में इस पर विस्तृत चर्चा और बहस होनी चाहिए।

भारत की चुप्पी आपराधिक लापरवाही: जॉन ब्रिटास

माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार के रुख की और भी तीखी आलोचना की।इसे 140 करोड़ भारतीयों का अपमान बताते हुए उन्होंने कहा,जब एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र पर एकतरफा हमला हो रहा है, तब भारत की चुप्पी अपराधिक लापरवाही जैसी है।भारत ने दुनिया भर में जो साख और सद्भावना कमाई थी,उसे सरकार दांव पर लगा रही है।

राज्यसभा में जबरदस्त नारेबाजी और हंगामा

इससे पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने युद्ध क्षेत्र में मारे गए भारतीय नागरिकों का मुद्दा उठाने की कोशिश की। जैसे ही खरगे ने बोलना शुरू किया सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विरोध करना शुरू कर दिया। सदन में जारी भारी नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने खरगे को अपनी बात संक्षिप्त में खत्म करने को कहा और विदेश मंत्री को बयान देने के लिए आमंत्रित किया।

विदेश मंत्री ने क्या कहा

शोर-शराबे के बीच विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने सदन को बताया कि संघर्ष तब शुरू हुआ जब ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले हुए,जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं की मौत और व्यापक क्षति की खबर है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।एस जयशंकर ने कहा कि खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत का मानना है कि केवल बातचीत और कूटनीति से ही तनाव कम किया जा सकता है। सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने क्षेत्र से गुजरने वाले और वहां रहने वाले भारतीयों के सामने आने वाली चुनौतियों की समीक्षा की है।


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