दिल्ली में गर्मी का हाई अलर्ट,55% इलाके भीषण खतरे की चपेट में,सूरज ढलने के बाद भी नहीं मिल रही राहत


दिल्ली में गर्मी का हाई अलर्ट,55% इलाके भीषण खतरे की चपेट में,सूरज ढलने के बाद भी नहीं मिल रही राहत

मनोज बिसारिया | 11 Mar 2026

 

नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस समय जलवायु परिवर्तन के गंभीर दौर से गुजर रही है।हीट रिस्क इंडेक्स के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली अब देश के सबसे अधिक गर्मी वाले जोखिम क्षेत्रों में शुमार हो गई है।थिंक टैंक काउंसिल आन एनर्जी,एनवायरनमेंट एंड वाटर(सीईईडब्ल्यू) की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के 55 फीसदी जिले बेहद उच्च जोखिम श्रेणी में हैं,जबकि बाकी बचे 45 फीसदी जिले 'उच्च जोखिम की श्रेणी में आते हैं।

बढ़ती गर्मी उड़ा रही रातों की नींद

सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू रात के तापमान में होने वाली बढ़ोतरी है।आंकड़ों की तुलना करें तो 1982-2011 के मुकाबले पिछले दशक (2011-2022) में हर गर्मी के सीजन में छह अतिरिक्त बेहद गर्म रातें दर्ज की गई हैं। हालांकि दिन के तापमान में कोई बहुत बड़ी बढ़ोतरी नहीं देखी गई है,लेकिन रातों का ठंडा न होना दिल्ली के लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है।हालांकि तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने दिल्ली के साथ-साथ मुंबई,बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों में भी रातों के तापमान को प्रभावित किया है, लेकिन दिल्ली की स्थिति फिलहाल सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

उमस और अर्बन हीट आइलैंड का डबल अटैक

दिल्ली की गर्मी अब सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं है।पिछले दशक में सापेक्ष आर्द्रता में नौ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे फील लाइक तापमान (महसूस होने वाली गर्मी) काफी बढ़ गया है।दिन और रात के तापमान के बीच का अंतर कम होता जा रहा है,जिसका अर्थ है कि सूरज ढलने के बाद भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही।ऊंची इमारतें और सघन जनसंख्या अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट पैदा कर रहे हैं,जो गर्मी को सोख लेते हैं और उसे बाहर नहीं निकलने देते।

बुजुर्ग,बच्चे और हाशिए पर रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित

दिल्ली की बढ़ती आर्थिक गतिविधियां और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की आशंका के बीच सबसे बड़ा खतरा इंसानी जानों पर है।दिल्ली की एक बड़ी आबादी,जिसमें बुजुर्ग और छोटे बच्चे शामिल हैं,इस हीट स्ट्रेस के प्रति बेहद संवेदनशील हैं।विशेष रूप से झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के पास कूलिंग सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है।

  सरकार का हीट एक्शन प्लान

बढ़ते संकट को देखते हुए रेखा गुप्ता सरकार ने पिछले साल अपना हीट एक्शन प्लान जारी किया है।यह प्लान न केवल आपातकालीन स्थिति में तत्काल राहत देने का काम करेगा बल्कि भविष्य में गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलावों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा,लेकिन इसके लिए जरूरी है कि गंभीरता से इस पर काम किया जाए।


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