राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंचीं रामनगरी,श्रीराम यंत्र स्थापना पूजन में हुईं शामिल,रामलला का किया 


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंचीं रामनगरी,श्रीराम यंत्र स्थापना पूजन में हुईं शामिल,रामलला का किया 

धनंजय सिंह | 19 Mar 2026

 

अयोध्या।श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आमंत्रण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु डेढ़ साल के अंतराल पर दूसरी बार नवरात्रि के पहले दिन रामनगरी अयोध्या पहुंची।राम मंदिर में दूसरे तल पर राम परिवार दरबार में स्थापित किए जा रहे श्रीराम यंत्र के पूजन में राष्ट्रपति शामिल हुईं और रामलला का दर्शन किया। इससे पहले राष्ट्रपति ने राम मंदिर परिसर देखा और दुर्गा माता मंदिर में पूजा-अर्चना की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लगभग साढ़े 10 बजे अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचीं।एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व केशव मौर्य सहित अन्य ने उनका भव्य स्वागत किया।एयरपोर्ट से रामजन्मभूमि परिसर तक बने 20 से अधिक सांस्कृतिक मंचों पर लगभग ढाई सौ कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुति दी। रामनगरी में लगभग 5 घंटे रुकने के बाद राष्ट्रपति दोपहर 3 बजे मथुरा के लिए रवाना होंगी।

मथुरा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस्कॉन और प्रेम मंदिर में दर्शन करेंगी।शुक्रवार 20 मार्च को राष्ट्रपति प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करेंगी।रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राष्ट्रपति का यह दूसरा अयोध्या दौरा है। इससे पहले राष्ट्रपति 1 मई 2024 को अयोध्या आई थीं,तब उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया था।

आपको बता दें राम मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र और श्रीराम नाम स्वर्णांकित रजत पट्टिका का सप्त दिवसीय अनुष्ठान के उपरांत यथास्थान पर स्थापित कर दिया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूजन के बाद इस सप्त दिवसीय अनुष्ठान की पूर्णाहुति हवन के साथ होगी। पंच धातु से निर्मित व प्राण प्रतिष्ठित श्रीराम यंत्र कांची कामकोटि शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी विजयेन्द्र सरस्वती ने राम मंदिर में स्थापित कराने के लिए ट्रस्ट को प्रदान की थी। इसके पहले श्रीराम यंत्र को कांची मठ में पूजा-अर्चना के बाद तिरुपति देवस्थानम ले जाया गया। यहां दोबारा पूजन के बाद पूरे देश में रथयात्रा के जरिए यहां लाया गया था।

तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि ने बताया कि दूसरे तल पर राम नाम मंदिर भी स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास महाराज ने श्रीराम चरित मानस में स्पष्ट किया है कि प्रभु श्रीराम से बढ़कर उनके नाम की महिमा है। उन्होंने बताया कि यह पट्टिका चांदी में निर्मित है और साढ़े फिट की है। इसके मध्य में श्रीराम नाम। स्वर्ण से अंकित किया गया है। राम यंत्र को कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित मठ में तैयार किया गया। इसके बाद इसे कांचीपुरम से तिरुपति (आंध्र प्रदेश) लाया गया। फिर रथयात्रा के जरिए 10 दिन पहले इसे अयोध्या पहुंचाया गया। राम यंत्र का वजन 150 किलो है। इस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।


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