दिल्ली बनी विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानी,भारत की एयर क्वालिटी चिंताजनक


दिल्ली बनी विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानी,भारत की एयर क्वालिटी चिंताजनक

मनोज बिसारिया | 25 Mar 2026

 

नई दिल्ली।पूरे विश्व में बढ़ते प्रदूषण के बीच भारत की राजधानी दिल्ली के लिए एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है।वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के नए आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में शीर्ष पर बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक 

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 82.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई है,जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सुरक्षित मानकों से 16 गुना अधिक है।

संकट अब मौसमी नहीं

स्विस एयर क्वालिटी टेक्नालाजी कंपनी आइक्यू एयर द्वारा मंगलवार को वैश्विक स्तर पर आनलाइन जारी की गई यह रिपोर्ट रिपोर्ट 143 देशों के 9,400 से अधिक शहरों के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि दिल्ली और भारत के अन्य शहरों में वायु प्रदूषण का संकट अब केवल सर्दियों तक सीमित रहने वाली 'मौसमी समस्या' नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गहरी ढांचागत समस्या बन चुकी है।

राष्ट्रीय स्तर पर भारत विश्व का छठा सबसे प्रदूषित देश 

राष्ट्रीय स्तर पर भारत विश्व का छठा सबसे प्रदूषित देश बना हुआ है,जहां पीएम 2.5 का औसत स्तर 48.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। मध्य और दक्षिण एशिया के देशों में प्रदूषित शहरों का क्लस्टर लगातार बढ़ रहा है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़े खतरे का संकेत है।

बढ़ती गाड़ियां और एसयूवी,प्रदूषण का मुख्य स्रोत

ग्रीनपीस इंडिया के क्लाइमेट एंड एनर्जी कैंपेनर आकिज फारूक ने इस संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें अब केवल पराली जलाने या मौसम को दोष देने के बजाय कड़े सवाल पूछने होंगे।फारूक ने कहा,भारतीय शहरों में वायु गुणवत्ता लगातार गिर रही है।फारूक ने कहा कि शहरों में निजी वाहनों,विशेष रूप से भारी एसयूवी की बढ़ती संख्या कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन और प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बन गई है। जैसे-जैसे लोग भारी निजी वाहनों की ओर बढ़ रहे हैं, शहरी हवा और अधिक जहरीली होती जा रही है।

फारूक ने दिया सुझाव 

फारूक ने सुझाव दिया कि सक्षम नागरिकों को सप्ताह में कुछ दिन निजी वाहनों का त्याग कर सार्वजनिक परिवहन अपनाना चाहिए। इससे न केवल उत्सर्जन कम होगा, बल्कि सरकार पर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुलभ और किफायती बनाने का दबाव भी बनेगा।

वैश्विक स्तर पर भी हालात बेकाबू

विश्व के केवल 14 फीसदी शहर ही डब्ल्यूएचओ के सुरक्षित मानकों (5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) को पूरा कर पाए हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती जंगलों की आग ने भी हवा को खराब करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

परिवहन,उद्योग और ऊर्जा प्रणालियों से होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण का स्थायी स्रोत बना हुआ है।

अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्र न केवल प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित हैं, बल्कि यहां प्रदूषण मापने के बुनियादी ढांचे की भी भारी कमी है।

दिखावे की कोशिशों से काम नहीं चलेगा

वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025 भारत के लिए एक 'वेक-अप काल है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है जब सरकार को मौसमी प्रतिक्रियाओं (जैसे केवल दीवाली या सर्दियों में कड़ाई) के बजाय ऊर्जा, परिवहन और शहरी नियोजन में प्रणालीगत बदलाव करने होंगे।बच्चों और बुजुर्गों जैसे संवेदनशील समूहों के लिए बढ़ता स्वास्थ्य जोखिम भारत की अर्थव्यवस्था और भविष्य दोनों पर भारी पड़ सकता है।


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