रामनवमी के भंडारे पर एलपीजी गैस संकट का असर,कहीं जला लकड़ी का चूल्हा,कहीं कम बना प्रसाद


रामनवमी के भंडारे पर एलपीजी गैस संकट का असर,कहीं जला लकड़ी का चूल्हा,कहीं कम बना प्रसाद

मनोज बिसारिया | 27 Mar 2026

 

नई दिल्ली।अमेरिका,इजराइल और ईरान में हो रहे युद्ध का असर पूरे विश्व में दिख रहा है।भारत में भी एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीजल की किल्लत है। लोगों को लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है,लेकिन लोग निराश होकर लौट जा रहे हैं। कहीं एलपीजी गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही तो कहीं सिलेंडर आते ही खत्म हो जा रहा है।कुछ लोग इसकी कालाबाजारी कर मालामाल भी हो रहे हैं।इन सबके बीच देशभर के मंदिरों में बनने वाले प्रसाद और भंडारा कम हो गया है।रामनवमी के मौके पर लोगों ने जगह-जगह पर भंडारा किया।कुछ जगह कम लोगों के लिए प्रसाद बना तो कुछ जगह लड़की के चूल्हे का इस्तेमाल हुआ।

200 लोगों के लिए हनुमान मंदिर में बना प्रसाद

दिल्ली के करोल बाग के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में भी रामनवमी के दिन भंडारे के आयोजन किया गया,लेकिन हर साल की तुलना में इस बार श्रद्धालुओं के लिए कम प्रसाद कम  बना।कारण गैस सिलेंडर की कमी बताया गया।आयोजकों ने बताया कि प्रसाद बनाने के लिए उनके पास सारी सामग्री है, लेकिन पकाने के लिए गैस नहीं है।भंडारे का प्रसाद बना रहे विनोद ने बताया कि पहले हम 500 श्रद्धालुओं का प्रसाद बनाते थे,लेकिन इस बार सिर्फ 200 का बना रहे हैं।आधे से भी ज्यादा श्रद्धालु कम हो गए।

प्रसाद के बनाने लिए 4400 में खरीदा सिलेंडर

विनोद ने बताया कि सिलेंडर न मिल पाने की वजह से प्रसाद कम बन रहा है।हम लोग पैसे लिए खड़े हैं,लेकिन सिलेंडर नहीं है।ब्लैक में कुछ सिलेंडर लिया गया,वो भी 4400 का एक सिलेंडर मिला।यह देखते हुए फिर हमने दो-तीन लकड़ी का चूल्हा बनाया,ताकि प्रसाद बनाया जा सके।विनोद ने बताया कि जो सिलेंडर पहले 900 रुपए का मिलता था, वो अब 3000 का मिल रहा है।ये दिक्कत सिर्फ हमारे साथ नहीं है, बल्कि आसपास में होने वाले भंडारों पर दिख रही है।पहले हमारे आसपास 10 से 12 भंडारे होते थे,इस बार मुश्किल से दो या चार हो रहे हैं।वहीं वाल्मीकि सदन में भी कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिले।गैस सिलेंडर की कमी और बढ़े दामों की वजह से भंडारों की संख्या कम हो गई।

चूल्हे पर बना प्रसाद

बात उत्तर प्रदेश की करें तो वाराणसी जिले के प्राचीन धर्मस्थल मां काली मंदिर पर दशकों से चैत्र नवरात्र और रामनवमी के अवसर पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस बार भी आयोजन किया गया,लेकिन एलपीजी गैस संकट को देखते हुए लगभग 10000 लोगों के लिए चूल्हे पर प्रसाद तैयार किया गया।आयोजनकर्ता ने कहा कि भंडारे में हमें 12 सिलेंडर की आवश्यकता होती है।भक्तों के सहयोग से हमें आठ सिलेंडर जरूर प्राप्त हुए हैं,लेकिन हम सबसे पहले चूल्हे पर प्रसाद बनाने का काम कर रहे हैं,उसके बाद सिलेंडर पर बनाएंगे,मौजूदा एलपीजी गैस आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए ऐसा किया जा रहा है।

एमपी में रामनवमी पर भंडारों की कम हुई संख्या 

मध्य प्रदेश में रामनवमी पर भंडारों की संख्या कम हो गई। ग्वालियर जिले में भंडारों पर एलपीजी गैस का संकट दिखाई दिया।ग्वालियर में चैत्र नवरात्र के समापन पर भक्तों द्वारा नगर के प्रमुख मार्गों व देवी मंदिरों पर भंडारों का आयोजन करने की परंपरा है,लेकिन एलपीजी गैस संकट से भंडारों की संख्या 50 से 60 प्रतिशत घट गई,जहां दो से पांच हजार लोगों की भंडारे की व्यवस्था होती थी,वहां 500 से एक हजार लोगों का भंडारा किया जा रहा है।

मंदिरों के भोग-प्रसाद पर संकट

बता दें कि जब से एलपीजी गैस संकट शुरू हुआ,मंदिरों के भोग-प्रसाद पर भी संकट के बादल छा गए।मंदिरों में होने वाले भंडारे तो एकदम ही बंद कर दिए गए।सिर्फ भगवान को चढ़ने वाला प्रसाद ही बनाया जा रहा।ये हाल केवल एक मंदिर का नहीं,बल्कि देशभर- अयोध्या,काशी से लेकर शिरडी और दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों का है।कर्नाटक के बनशंकरी मंदिर में अन्नप्रसादम बनना बंद हो गया है,जबकि शिरडी और पंढरपुर में स्थित खाद्य स्टालों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


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