प्रयागराज में गैस संकट के बीच जलेबी वाले का देसी जुगाड़,जल रहा पुराने मोबाइल से चूल्हा


प्रयागराज में गैस संकट के बीच जलेबी वाले का देसी जुगाड़,जल रहा पुराने मोबाइल से चूल्हा

धनंजय सिंह | 03 Apr 2026

 

प्रयागराज।गैस सिलेंडर ने जब साथ छोड़ दिया,तब हिम्मत और दिमाग ने रास्ता दिखाया।गैस सिलेंडर को लेकर लोग और छोटे कारोबारी परेशान हो रहे हैं।इसी बीच संगम नगरी के एक जलेबी विक्रेता ने अपने देसी जुगाड़ से एक तरीका निकाल लिया।जलेबी की दुकान पर चूल्हा गैस से नहीं,बल्कि पुराने टूटे हुए मोबाइल,बोतलों और पाइप के जुगाड़ से जल रहा है।यह देसी जुगाड़ अब लोगों के लिए हैरानी और सीख दोनों बन गया है।

संगम नगरी में अतरसुईया सब्जी मंडी के पास जलेबी की दुकान चलाने वाले अमन गुप्ता ने अनोखा चूल्हा तैयार किया है,जो बिना गैस के फर्राटेदार तरीके से जल रहा है और खास बात यह कि इसमें पुराने जले हुए मोबाइल का भी इस्तेमाल किया गया है।अमन का यह प्रयोग चर्चा का विषय बना हुआ है।

अमन गुप्ता ने जले हुए पुराने मोबाइल,ब्लोअर,तेल की खाली बोतल,पुरानी कोल्ड ड्रिंक की बोतल और लोहे के पाइप को जोड़कर एक ऐसा देसी चूल्हा तैयार किया है,जो आसानी से जलता है और लगातार तेज आंच देता है।इस चूल्हे की मदद से अमन रोजाना सैकड़ों ग्राहकों को गर्मागर्म और ताजा जलेबियां परोस रहे हैं।

गौरतलब है कि यह दुकान अमन के पिता ने शुरू की थी और यहां की जलेबी का स्वाद पूरे इलाके में मशहूर है,लेकिन हाल ही में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी से अमन का कारोबार दो दिनों के लिए पूरी तरह ठप हो गया था।परिवार की आजीविका इसी दुकान पर निर्भर होने से अमन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी,ऐसे में अमन ने एक सस्ता और कारगर तरीका खोजने का फैसला किया।

लगभग ढाई हजार रुपये की लागत से तैयार इस चूल्हे में रोजाना लगभग 5 लीटर जले हुए मोबिल ऑयल का इस्तेमाल होता है,इसकी लागत लगभग 200 रुपये पड़ती है।यह खर्च कमर्शियल गैस सिलेंडर के मुकाबले काफी सस्ता है।यही कारण है कि अमन का कारोबार फिर से पटरी पर लौट आया है और दुकान पर सुबह 6 बजे से लेकर 11 बजे तक ग्राहकों की भारी भीड़ लगी रहती है।

अमन गुप्ता की दुकान पर आने वाले लोग न सिर्फ जलेबी का स्वाद लेने के लिए उत्साहित हैं, बल्कि इस अनोखे जुगाड़ को देखने के लिए भी खास तौर पर पहुंच रहे हैं।कई ग्राहक और आसपास के दुकानदार अमन से इस चूल्हे को बनाने की जानकारी भी ले रहे हैं, ताकि वे भी गैस की बढ़ती कीमतों और किल्लत से राहत पा सकें।

अमन गुप्ता का कहना है कि मजबूरी में शुरू किया गया यह प्रयोग अब उनके लिए फायदे का सौदा बन गया है।अमन  ने बताया कि यह चूल्हा न केवल सस्ता है,बल्कि लगातार काम करने में भी बेहद कारगर साबित हो रहा है।संकट के समय में भी कैसे नई राह निकाली जा सकती है, यह कहानी उसी की एक तस्वीर है।


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