नई दिल्ली।तरनजीत सिंह संधू दिल्ली के उपराज्यपाल
का पदभार ग्रहण करने के बाद पिछले लगभग एक महीने से दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर जा रहे हैं और लोगों से संवाद कर रहे हैं।दिल्ली के लोगों ने एलजी से वायु प्रदूषण,दूषित यमुना, गर्मी में जल संकट और मानसून में जलभराव की समस्या को लेकर अपनी चिंता प्रकट की है।
एलजी और सीएम ने वासुदेव और यमुना बाजार का किया निरीक्षण
इसी को ध्यान में रखकर बुधवार को एलजी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ वासुदेव घाट और यमुना बाजार घाट का निरीक्षण किया और यमुना की सफाई और इसके तट पर चल रहे विकास कार्यों के साथ ही मानसून की तैयारी की समीक्षा की।सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग,दिल्ली जल बोर्ड,डीपीसीसी और दिल्ली नगर निगम सहित सभी संबंधित विभागों को कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया,जिसमें स्पष्ट लक्ष्य और उनके कार्यान्वयन की समय-सीमा तय होगी।
वजीराबाद से ओखला तक बनेगा ग्रीन रिवरफ्रंट
अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन,सीवेज नियंत्रण और अवैध कचरा निस्तारण पर जीरो टालरेंस की नीति अपनाने, वजीराबाद से ओखला तक रिवर फ्रंट को पर्यावरण-अनुकूल बनाने, हरित विकास, वेटलैंड्स संरक्षण और जैव-विविधता पार्कों के निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।नदी के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए इसके किनारे कच्चे वाकिंग और साइकिल ट्रैक विकसित करने और घाटों को अलग-अलग टुकड़ों के बजाय एक साथ विकसित करने को कहा गया है।अधिकारियों ने उन्हें यमुना नदी के किनारों को पारिस्थितिक रूप से पुनर्जीवित करने, जैव-विविधता को बढ़ावा देने, प्रदूषण को कम करने जैसे कार्यों की जानकारी दी।एलजी ने कहा कि यमुना पुनर्जीवन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की प्राथमिकता में शामिल है। इस कार्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के लिए 21.44 फीसदी बजट
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पहले दिन से ही मां यमुना की स्वच्छता और पुनर्जीवन के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में 22,236 करोड़ (लगभग 21.44 प्रतिशत) पर्यावरण संरक्षण के लिए है। सीएम रेखा ने नदी में जल धारण क्षमता बढा़ने के लिए अतिक्रमण हटाने, तीन-स्तरीय एजेंडा के अंतर्गत नदी और इसमें गिरने वाले नालों से गाद निकालने, जल प्रवाह को सुचारु बनाने और जलभराव वाले हाॅटस्पाॅट्स के स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।कहा कि यमुना का पुनर्जीवन एक दीर्घकालिक एवं सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए निरंतर प्रयास, जनसहभागिता तथा प्रभावी प्रबंधन आवश्यक है।