लखनऊ से गुजरने वाली ट्रेनों की जनरल और स्लीपर बोगियों में किन्नरों की वसूली से यात्री त्रस्त,पैसे न देने पर करते हैं मारपीट,महिलओं का गैंग भी सक्रिय 


लखनऊ से गुजरने वाली ट्रेनों की जनरल और स्लीपर बोगियों में किन्नरों की वसूली से यात्री त्रस्त,पैसे न देने पर करते हैं मारपीट,महिलओं का गैंग भी सक्रिय 

धनंजय सिंह | 07 May 2026

 

लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से गुजरने वाली ट्रेनों की जनरल और स्लीपर बोगियों में किन्नरों की वसूली से यात्री त्रस्त हैं।किन्नर यार्ड के पास से ट्रेन में सवार होते हैं और धमका कर वसूली करते हैं।इनमें अधिकतर किन्नर नकली हैं। 

ट्रेनों में किन्नरों का वसूली का इन यात्रियों पर रहता है ज्यादा जोर

ट्रेनों में किन्नरों का वसूली पर जोर एक खास वर्ग के यात्रियों पर ज्यादा रहता है।ये वो यात्री होते हैं जो दूसरे प्रदेशों से कमा कर वापस लौट रहे होते हैं।इनसे वसूली के लिए किन्नर सारी हदें पार कर देते हैं।पैसे न देने पर पहले तो उनसे अभद्रता करते हैं,फिर धमकाते हैं।मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं। उन्नाव-ऐशबाग रेल रूट पर किन्नर पंजाब,दिल्ली,चेन्नई, गुजरात,हरियाणा,मुंबई की तरफ से आने वाली ट्रेनों में चढ़ते हैं।इनमें राप्ती सागर,वैशाली,अवध असम,गोरखधाम, आम्रपाली,पुष्पक आदि ट्रेनें शामिल हैं।

यार्ड के पास से ट्रेनों में सवार होते हैं किन्नर 

स्टेशनों पर आरपीएफ और जीआरपी होने से वहां पर किन्नर दूर-दूर तक नजर नहीं आते।प्लेटफार्म से जब ट्रेन निकल कर यार्ड के पास से काफी धीमी रफ्तार से जाती है तब ट्रेन में किन्नर सवार हो जाते हैं।अगला स्टेशन आने से पहले आउटर पर ट्रेन धीमी होती है तो उतर जाते हैं।ऐसा कर किन्नर आरपीएफ और जीआरपी की नजरों से दूर रहते हैं।

नकली किन्नर करते हैं वसूली

आरपीएफ के मुताबिक किन्नरों की धर-पकड़ के लिए अभियान चलाया जाता है।जब पकड़ में आते हैं तब पता चलता है कि इसमें अधिकतर तो किन्नर हैं ही नहीं हैं,पुरुष और महिलाएं किन्नर बन कर जबरन वसूली करती हैं। इनका चालान किया जाता है। जीडी में ट्रांसजेंडर शब्द का प्रयोग होता है।

महिलाओं का गैंग भी सक्रिय

आरपीएफ की जांच में खुलासा हुआ है कि ट्रेनों में वसूली करने के लिए कुछ महिलाओं का गैंग भी सक्रिय हैं।इस गैंग की अधिकतर सदस्य आलमबाग नटखेड़ा क्षेत्र में रहती हैं। चार से पांच के समूह में चलने वाली यह महिलाएं कई बार वसूली करने के दौरान यात्रियों से अभद्रता पर उतारू हो जाती हैं।

रवींद्रालय के पास रात में सक्रिय

बता दें कि चारबाग में रवींद्रालय के पास आधी रात तक कुछ किन्नर सज संवर कर सक्रिय हो जाते हैं। आठ से दस की संख्या में रोजाना यहां किन्नर ग्राहकों की तलाश में खड़े रहते हैं। ग्राहकों को लुभाने के लिए अक्सर अश्लील हरकतें करते हैं।

पकड़े जाते हैं किन्नर,लेकिन वसूली नहीं रुकती

कथित किन्नरों की वसूली,यात्रियों से अभद्रता और मारपीट की शिकायतें आरपीएफ में आती रहती हैं।आरपीएफ की ओर से कार्रवाई भी की जाती है।ऐशबाग स्टेशन की आरपीएफ टीम ने पिछले दिनों में 15 से 20 कथित किन्नरों के खिलाफ कार्रवाई भी की। बावजूद इसके लिए वसूली और अभद्रता रुकती नहीं है।आरपीएफ थाना चारबाग के प्रभारी भूपेंद्र सिंह कहते हैं कि लगातार सख्ती बरती जा रही है। ट्रेनों में चलने वाली टीम भी निगरानी बनाए रहती है।

क्षेत्र के किन्नरों से लेते हैं अनुमति

ट्रेनों में वसूली करने वाले कथित किन्नरों का समूह वसूली शुरू करने से पहले संबंधित क्षेत्र के किन्नरों के गुरुओं से अनुमति लेता है।वसूली में मिलने वाली रकम का कमीशन और काम के घंटे तय होते हैं। बदले में बैठे-बैठाए उन्हें कमीशन मिलता रहता है।बताते हैं कि एक दिन में 10 से 15 हजार की कमाई होती है। कमाई और कमीशन में हेराफेरी न हो, इसके लिए किन्नर समुदाय के एक-दो सदस्य उन पर नजर रखते हैं।

किन्नर समुदाय में गुरु की भूमिका अहम

 किन्नर समाज की धर्म गुरु प्रियंका सिंह रघुवंशी का कहना है कि किन्नर समुदाय एक पारंपरिक गुरु-चेला व्यवस्था पर आधारित होता है। इसमें गुरु समूह का मुखिया होता है,जो अपने चेले को संरक्षण,रहने की जगह और सामाजिक पहचान देता है। गुरू ही तय करता है कि किस क्षेत्र में कौन सा समूह काम करेगा।कई मामलों में कमाई का एक हिस्सा गुरू को देना होता है,जिसे नजराना कहा जाता है।पारंपरिक,गद्दीनिशा किन्नर कभी नेग या शगुन जबरन वसूल नहीं करता। किन्नर के वेष में जो नकली किन्नर होते हैं वही जबरन वसूली करते हैं।


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