नई दिल्ली।दिल्ली-एनसीआर में बीते तीन दिनों से चल रहा ट्रांसपोर्टरों का चक्का जाम शनिवार को खत्म हो गया।सरकार के साथ हुई सकारात्मक बातचीत और आश्वासन के बाद चक्का जाम खत्म हो गया।ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरीश सभरवाल ने हड़ताल खत्म करने की जानकारी दी।हालांकि सभरवाल ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि यदि 3 महीने के भीतर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो अगली बार यह लड़ाई सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि पूरे देश में चक्का जाम किया जाएगा।
हरीश सभरवाल ने बताया कि पिछले तीन दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी।इस सिलसिले में दिल्ली व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें सरकार ने ट्रांसपोर्टरों की तीन प्रमुख मांगों पर कमेटी बनाकर काम करने व राहत देने का लिखित आश्वासन दिया है।
हरीश सभरवाल ने कहा कि मिडिल ईस्ट देशों में जारी संकट के चलते पहले से ही देश में आर्थिक व सप्लाई चेन का क्राइसिस चल रहा है,ऐसे में आम जनता की परेशानियों को देखते हुए लंबी हड़ताल करना उचित नहीं था।सरकार ने मुख्य मांगों पर सहमति जताई है,जिसके बाद हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया है।
हरीश सभरवाल ने साफ लहजे में कहा...
हरीश सभरवाल ने साफ लहजे में कहा है कि यह सिर्फ 3 महीने का विराम है। यदि सरकार ने कमेटी बनाने के बाद तय समय सीमा में अपनी घोषणाओं को अमलीजामा नहीं पहनाया तो 3 महीने बाद देश के 95 लाख ट्रक चालक, 50 लाख बस-टैक्सी ऑपरेटर व इस सेक्टर से जुड़े करोड़ों लोग मिलकर देशव्यापी चक्का जाम करेंगे.
सरकार के साथ इन 3 बड़ी मांगों पर बनी बात
सरकार भी मानती है कि BS-VI श्रेणी के वाहनों से प्रदूषण नहीं होता है व ग्रैप लागू होने के बाद भी इन पर प्रतिबंध नहीं लगता,इसलिए इन वाहनों से पर्यावरण मुआवजा शुल्क न वसूला जाए।दिल्ली-एनसीआर में लगभग 17 लाख ऐसे कमर्शियल वाहन हैं,जिनकी वैध अवधि अभी बाकी है।अगर इन पर अचानक प्रतिबंध लगा दिया गया तो ट्रांसपोर्टर अपनी गाड़ियों की किस्तें कैसे चुकाएंगे।सरकार इस पर पुनर्विचार करेगी।दूध,सब्जी,फल और दवाओं जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई करने वाले वाहनों से इस साल फरवरी से शुल्क वसूला जा रहा था,जिससे जरूरी चीजों के दाम बढ़ रहे थे।सरकार इन्हें दोबारा शुल्क मुक्त करने पर सहमत हुई है।
थमने लगे थे मंडियों में पहिए,3 महीने बाद आर-पार की लड़ाई
बता दें कि 21 मई से शुरू हुई इस हड़ताल से गाजीपुर सब्जी एवं फल मंडी,आनंद विहार बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर समेत कई इलाकों में बड़े कमर्शियल वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए थे।राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से आए ट्रक चालकों ने साफ कह दिया था कि डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और भारी टैक्स के चलते वे कोई नई बुकिंग नहीं लेंगे. छोटे मालवाहकों के मालिकों ने भी इस हड़ताल का पुरजोर समर्थन किया था।रोजाना दिल्ली आने वाले लगभग 6,000 आवश्यक वाहनों के रुकने से फल,सब्जी,दूध और दवाओं की किल्लत होने ही वाली थी कि समय रहते सरकार और संगठन के बीच सहमति बन गई।