नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान की जंग से विमान ईंधन की कीमतों में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है।वित्तीय दबाव के बीच टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन एयर इंडिया ने जून से अगस्त के बीच अपनी घरेलू उड़ानों में 20 फीसदी तक की कटौती करने का निर्णय लिया है।एयरलाइन प्रबंधन पर लगातार बढ़ते परिचालन घाटे को कम करने का भारी दबाव है।
ईंधन की आसमान छूती कीमतें और वित्तीय दबाव
एयर इंडिया के अधिकारियों के मुताबिक ईरान संघर्ष से पहले विमान ईंधन की कीमत लगभग 80,000 रुपए प्रति किलोलीटर थी,अब बढ़कर 1 लाख रुपए प्रति किलोलीटर से अधिक हो चुकी है।वर्तमान में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 फीसदी हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है।वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी को 26,800 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ है,जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 गुना अधिक है,ऐसे में इन रूटों पर उड़ानों का संचालन जारी रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया था।
उड़ानों के फेरों में युक्तिसंगत कमी
एयर इंडिया वर्तमान में प्रति सप्ताह कुल 4,400 उड़ानों का संचालन करता है,जिसमें लगभग 3,600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शामिल हैं। 22 फीसदी की इस अस्थायी कटौती से प्रति सप्ताह लगभग 720 घरेलू उड़ानें प्रभावित होंगी।कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रूट को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि चुनिंदा घरेलू मार्गों पर केवल उड़ानों के फेरे कम किए जा रहे हैं।
कनेक्टिंग फ्लाइट्स की मांग में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई कटौती का सीधा असर घरेलू उड़ानों पर भी पड़ा है।विदेश से आने वाले यात्रियों की संख्या घटने के कारण दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े विमानन केंद्रों के लिए कनेक्टिंग घरेलू उड़ानों की मांग में भारी कमी आई है। मांग का यह असंतुलन भी उड़ानों को युक्तिसंगत बनाने का एक मुख्य कारण बना है।
प्रभावित यात्रियों के लिए राहत के उपाय
विमानन कंपनी ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि स्थिति सामान्य होते ही उड़ानों को पूर्ववत कर दिया जाएगा।इस दौरान प्रभावित होने वाले यात्रियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी।
वैकल्पिक उड़ान:यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दूसरी उपलब्ध उड़ानों में सीट दी जाएगी।
तारीख में मुफ्त बदलाव: यात्रा की तिथि बदलने पर कोई पेनल्टी या चेंज फीस नहीं ली जाएगी।
पूर्ण रिफंड: विकल्प पसंद न आने पर यात्री अपनी टिकट का पूरा पैसा वापस ले सकते हैं।