नई दिल्ली।रेखा गुप्ता सरकार ईवी पालिसी 2.0 के मसौदे के तहत दिल्ली में ई-रिक्शा की संख्या तय करने की योजना बना रही है।इसका मकसद दिल्ली में लगातार बढ़ रही ट्रैफिक की समस्या को कम करना,सड़कों पर सुरक्षा बढ़ाना और गैर-कानूनी गाड़ियों की बेतहाशा बढ़ती संख्या पर रोक लगाना है।
राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक की भीड़ से निपटने के लिए रेखा सरकार ई-रिक्शा की संख्या को 250000 तक सीमित करने की योजना बना रही है।रेखा सरकार बिना मोटर वाली गाड़ियों के तेजी से बढ़ते सेक्टर को भी रेगुलेट करना चाहती है। अधिकारियों के मुताबिक यह सेक्टर शहर में आवाजाही के मामले में एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। ईवी पॉलिसी के मसौदे में कहा गया है कि ट्रैफिक जाम,सड़कों पर सुरक्षा से जुड़े खतरे,हवा और ध्वनि प्रदूषण और ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा की संख्या तय करने का फैसला किया है।बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद दिल्ली में रजिस्टर्ड ऑटो-रिक्शा की कुल संख्या की सीमा 100000 तय की गई है।
नई पॉलिसी के ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि 250000 की तय सीमा से ज्यादा किसी भी ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि भविष्य में सरकार द्वारा इस सीमा में कोई बदलाव न किया जाए।आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में इस समय 205665 रजिस्टर्ड ई-रिक्शा हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि शहर की सड़कों पर लगभग इतनी ही संख्या में ई-रिक्शा अवैध रूप से चल रहे हैं। ऐसे में ई-रिक्शा की कुल संख्या 400000 से भी ज्यादा हो गई है।
अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में ई-रिक्शों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। 2025 में 44361 ई-रिक्शे रजिस्टर किए गए, जो 2024 में 27798 रिक्शों की संख्या से लगभग दोगुना है। 2023 में रजिस्ट्रेशन की संख्या 17546 थी और 2022 में सिर्फ 13611 थी।
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों,नागरिक निकायों और लोगों ने कई घनी आबादी वाले इलाकों में ई-रिक्शों की वजह से होने वाली भीड़भाड़ और उनके असुरक्षित आवागमन को लेकर बार-बार चिंता जताई।पिछले कुछ सालों में यह क्षेत्र बिना किसी प्रभावी सीमा या रूट रेगुलेशन के तेजी से बढ़ा है।मेट्रो स्टेशनों, बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों के आसपास अवैध संचालन, सड़क सुरक्षा और भीड़भाड़ को लेकर चिंताएं हैं।
अधिकारी ने बताया कि विभाग उन अनाधिकृत ई-रिक्शों के खिलाफ बड़े पैमाने पर एक अभियान चलाने की तैयारी भी कर रहा है,जो बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन या परमिट के चल रहे हैं। कुछ इलाकों में भीड़भाड़ कम करने के लिए इन वाहनों के रूट और पॉइंट भी तय किए जा सकते हैं। इनमें से कई अवैध वाहन तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते और बिना किसी वैध दस्तावेज के चल रहे हैं।आने वाले महीनों में इन पर सख्ती बढ़ाई जाएगी।
ईवी ड्राफ्ट पॉलिसी में रजिस्ट्रेशन के नियमों को और सख्त करने का प्रस्ताव भी है।इसमें कहा गया है कि ई-रिक्शे का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सिर्फ मालिक के नाम पर ही जारी किया जाएगा।मालिक को ही उस वाहन का ड्राइवर भी होना जरूरी होगा।
पॉलिसी के मुताबिक एक ड्राइविंग लाइसेंस पर सिर्फ एक ही ई-रिक्शा रजिस्टर किया जा सकता है।इसके अलावा शहर में ई-रिक्शा रजिस्टर करवाने के लिए सिर्फ दिल्ली के निवासी ही योग्य होंगे। ड्राफ्ट पॉलिसी में यह भी जरूरी किया गया है कि सही तरीके से रजिस्टर हुए सभी ई-रिक्शा को ई-रिक्शा कंप्लायंस सर्टिफिकेट (ईसीसी) लेना होगा।
ड्राफ्ट पॉलिसी में ई-रिक्शा मालिकों के लिए स्क्रैपिंग से जुड़ी एक इंसेंटिव स्कीम भी शुरू की गई है। इस प्रस्ताव के तहत 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2022 के बीच दिल्ली में रजिस्टर हुए किसी ई-रिक्शा को स्क्रैप करवाने पर 35000 रुपए का स्क्रैपिंग इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके लिए किसी अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर से जारी किया गया सर्टिफिकेट जमा करना जरूरी होगा।इसके अलावा इस पॉलिसी में दिल्ली में रजिस्टर्ड पुरानी ग्रामीण सेवा गाड़ियों को स्क्रैप करने वाले मालिकों को 15000 रुपए का स्क्रैपिंग इंसेंटिव देने का प्रस्ताव है,लेकिन शर्त यह है कि स्क्रैप करने के छह महीने के भीतर लिथियम-आयन या अन्य उन्नत बैटरी तकनीक से लैस एक नई इलेक्ट्रिक ग्रामीण सेवा गाड़ी खरीदी जाए।