खुला होर्मुज स्ट्रेट,एलपीजी सिलेंडर,पेट्रोल-डीजल सस्‍ता होने का इंतजार


खुला होर्मुज स्ट्रेट,एलपीजी सिलेंडर,पेट्रोल-डीजल सस्‍ता होने का इंतजार

मनोज बिसारिया | 19 Jun 2026

 

नई दिल्ली।केंद्र सरकार धीरे-धीरे उन इमरजेंसी उपायों को वापस ले सकती है,जिन्‍हें मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच क‌ई कदम उठाये गये थे।ऐसे शुरू किए गए इमरजेंसी एनर्जी-सिक्योरिटी उपायों की सरकार समीक्षा कर सकती है। ग्‍लोबल स्थिति सामान्य होने पर उन्हें धीरे-धीरे वापस लिए जाने की उम्‍मीद है।यह जानकारी एक सरकारी अधिकारी ने दी है।

बता दें कि एहतियाती उपायों में एलपीजी सप्लाई की बेहतर निगरानी, घरेलू नेचुरल गैस आवंटन को फिर से प्राथमिकता देना और फ्यूल की जमाखोरी रोकने के लिए कड़े नियंत्रण शामिल हैं। ये उपाय वैश्विक तेल और गैस सप्लाई चेन में संभावित रुकावटों की चिंताओं के बीच घरेलू ऊर्जा उपलब्धता को सुरक्षित करने के लिए शुरू किए गए थे।

भारत के लिए बड़ी राहत

अमेरिका और ईरान ने शांति समझौते का टेक्स्ट जारी किया है,जिस पर उनके राष्ट्रपतियों ने अपने 111 दिन के युद्ध को खत्म करने के लिए हस्ताक्षर किए हैं।यह समझौता होर्मुज स्‍ट्रेट के रास्ते शिपिंग को फिर से शुरू या सामान्य कर सकता है।इससे भारत को बड़ी राहत मिलेगी।भारत विश्व के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है।

जानें अधिकारी ने क्या कहा 

अधिकारी ने कहा कि हम बदलती स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।जब हमें भरोसा हो जाएगा कि वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य हो गई है तो हमने जो उपाय किए थे,उनकी समीक्षा की जाएगी,उनमें ढील दी जाएगी।इमरजेंसी उपाय एहतियाती प्रकृति के थे। इनका मकसद भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में जरूरी फ्यूल की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करना था।

अधिकारी ने ये कहा 

अधिकारी ने कहा कि जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य होगी और सप्लाई से जुड़े जोखिम कम होंगे,सरकार इन प्रतिबंधों की समीक्षा करेगी,उन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाने पर विचार किया जाएगा।होर्मुज ईरान और ओमान के बीच का संकरा जलमार्ग है,यह वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है।प्रमुख खाड़ी उत्पादकों के लिए मुख्य निर्यात मार्ग के रूप में यह काम करता है।इनमें सऊदी अरब, इराक,कुवैत,संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देश शामिल हैं।ये सभी भारत के लिए प्रमुख एनर्जी सप्‍लायर हैं।

सप्लाई हो गई थी बाधित

बता दें कि फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलमार्ग से कच्चे तेल (पेट्रोल-डीजल जैसे फ्यूल बनाने के लिए कच्चा माल) और नेचुरल गैस (बिजली पैदा करने,फर्टिलाइजर बनाने,गाड़ियों को चलाने के लिए सीएनजी में बदलने और घरों की रसोई में खाना पकाने के लिए पाइप से सप्लाई करने के लिए इस्तेमाल होने वाला फीडस्टॉक) की सप्लाई बाधित हो गई थी। इससे कच्चे तेल की कीमतों,शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम और माल ढुलाई दरों में भारी बढ़ोतरी हुई थी।सूत्रों ने कहा कि होर्मुज के फिर से खुलने और तनाव कम होने से भारत जैसे ऊर्जा-आयात करने वाले देशों के लिए स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने में मददगार साबित हो सकता है।

इस तरह के किए गए हैं उपाय

बता दें कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है।भारत ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद घरेलू फ्यूल सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए कई आपातकालीन उपाय शुरू किए थे।यह क्षेत्र देश के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का एक बड़ा हिस्सा है। केंद्र सरकार ने एलपीजी (सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन) ऑर्डर लागू किया। इससे अधिकारियों को इन्वेंट्री पर कड़ी नज़र रखने, घरेलू सिलेंडरों के गलत इस्तेमाल को रोकने और जमाखोरी या ब्लैक-मार्केटिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का अधिकार मिला।राज्य सरकारों और तेल मार्केटिंग कंपनियों को एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखने और घरों व जरूरी सेवाओं के लिए बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

रिफाइनर्स से कहा गया कि वे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले स्रोतों को एलपीजी प्रोडक्शन में लगाकर इसका प्रोडक्शन बढ़ाएं

रिफाइनर्स से कहा गया कि वे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले स्रोतों को एलपीजी प्रोडक्शन में लगाकर इसका प्रोडक्शन बढ़ाएं।कंज्यूमर लेवल पर भी इस्तेमाल को रेगुलेट करने की कोशिश की गई। इसके लिए रिफिल बुकिंग के समय को बढ़ाया गया। होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल यूजर्स को सप्लाई में कटौती की गई।इसके साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू नेचुरल गैस सप्लाई के लिए प्राथमिकता तय करने का एक फ्रेमवर्क शुरू किया। इसके तहत सप्लाई में रुकावट आने पर घरों और ट्रांसपोर्ट के साथ फर्टिलाइजर सेक्टर को सप्लाई करने वाले सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को कम जरूरी इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स से ऊपर प्राथमिकता दी गई।पब्लिक सेक्टर की फ्यूल रिटेल कंपनियों को भी इन्वेंट्री मैनेजमेंट को मजबूत करने और घबराहट में खरीदारी (पैनिक बाइंग) को रोकने के निर्देश दिए गए।

उपायों का यह रहा है मकसद

इन उपायों में स्टॉक जमा करने से रोकने के लिए एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के बीच कम से कम समय का अंतर तय करना,बिना कॉन्ट्रैक्ट वाले ग्राहकों की ओर से पेट्रोल और डीजल की बहुत ज्‍यादा खरीदारी पर रोक लगाना और असामान्य मांग के पैटर्न के लिए रिटेल आउटलेट्स की निगरानी करना शामिल था।ये कदम एहतियाती उपाय के तौर पर उठाए गए थे ताकि रणनीतिक फ्यूल स्टॉक को सुरक्षित रखा जा सके,बाजार में स्थिरता बनी रहे।यह सुनिश्चित हो सके कि अगर जियोपॉलिटिकल तनाव से ग्लोबल एनर्जी ट्रेड पर असर पड़ता है तो भी ज़रूरी कंज्यूमर्स को बिना रुकावट एनर्जी सप्लाई मिलती रहे।

पेट्रोल-डीजल की कीमत अभी भी ज्यादा

पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतें तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई हैं,लेकिन पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतें अभी भी उनके इंटरनेशनल बेंचमार्क से कम हैं।युद्ध से जुड़ी रुकावटों के चरम पर ग्लोबल तेल की कीमतें फरवरी में 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इससे पेट्रोल और डीजल के प्रोडक्शन की लागत बढ़ गई,लेकिन सरकार ने मई के मध्य तक रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं किया। केंद्र सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की ताकि पश्चिम बंगाल समेत पांच अहम राज्यों में चुनाव के समय रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी से बचा जा सके।विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। वहीं सीएनजी की कीमतों में 6 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी दो किस्तों में 89 रुपये बढ़ाई गई।कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है क्योंकि खुदरा कीमतें लागत से कम हैं।गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं।


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