कैराना और शामली की बदलेगी तस्वीर,पलंगतोड़ खिलाएगी गुल


कैराना और शामली की बदलेगी तस्वीर,पलंगतोड़ खिलाएगी गुल

धनंजय सिंह | 27 Jun 2026

 

शामली।उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना कस्बे का नाम सुनते ही अब तक लोगों के ज़ेहन में पुरानी नकारात्मक चर्चाएं उभरती थीं,कैराना पलायन की एक दिल को दहला देने वाली तस्वीर सामने आती थी,लेकिन अब समय बदल चुका है। कैराना की छवि अब पलायन के पुराने दागी अतीत से पूरी तरह बाहर निकल कर एक नई और स्वादिष्ट पहचान की ओर बढ़ रही है।कैराना की इस नई पहचान का नाम पलंगतोड़ है।

पलायन से पहचान तक का सफर

​एक समय था जब कैराना अपनी कुछ दुखद घटनाओं के लिए सुर्खियों में रहता था,लेकिन अब यहां की स्थानीय मिठाई पलंगतोड़ अपनी मिठास और लाजवाब स्वाद से न केवल देश, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी धाक जमाने को तैयार है।स्थानीय प्रशासन और कारीगरों की मेहनत रंग ला रही है, जिससे इसको एक नई वैश्विक पहचान मिलने जा रही है।

​ एक जिला,एक व्यंजन में शामिल

​योगी सरकार की एक जिला,एक उत्पाद की तर्ज पर अब एक जिला,एक व्यंजन योजना के तहत कैराना की प्रसिद्ध मिठाई पलंगतोड़ को विशेष स्थान दिया गया है।बता दें कि शामली जिला पहले ही अपने गुड़ की मिठास से देश-विदेश में लोहा मनवा चुका है और अब पलंगतोड़ की एंट्री ने जिले को स्वाद की दुनिया में एक नए मुकाम पर खड़ा कर दिया है।

जानें ​क्या है पलंगतोड़ का राज

​अपने अनोखे नाम और बेजोड़ स्वाद से पलंगतोड़ मिठाई स्थानीय लोगों की पहली पसंद तो है ही,साथ ही दूर-दराज से आने वाले पर्यटक भी इसे चखना नहीं भूलते।अपनी अनूठी रेसिपी और शुद्धता के कारण इसे अब विदेशी बाजारों में निर्यात करने और वैश्विक मंच पर प्रमोट करने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है।

कैसे तैयार की जाती है पलंगतोड़ मिठाई

पलंगतोड़ मिठाई को तैयार करने के लिए पहले चीनी और पानी का घोल बनाया जाता है और उसको धीमी-धीमी आंच पर पकाया जाता है जब तक कि वह पककर गाढ़ा न हो जाए और उसके बाद दूसरी कढ़ाई पर बेसन को घी में मिलाकर उसे भूना जाता है और तब तक उसको भुना जाता हैं तब तक की उसका रंग हल्का सा बदल ना जाए फिर उसके बाद चीनी द्वारा तैयार की गई चाशनी में उस बेसन को मिलाया जाता है और फिर उसके बाद उसमें खोया डाला जाता है।फिर उसके बाद धीमी-धीमी आंच पर तकरीबन आधा घंटे तक उसे घूमाते हुए पकाया जाता है,उसके बाद जब पूरा मिश्रण तैयार हो जाता है, तो उसे एक ट्रे में डाल लिया जाता है और ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है,ट्रे में डालने के बाद उस पर ड्राई फ्रूट्स भी डाले जाते हैं, ताकि पलंगतोड़ को और स्वादिष्ट बनाया जा सके।जब वह ठंडा हो जाता है, तो उसकी कटिंग की जाती है और फिर पलंगतोड़ खाने के लिए तैयार हो जाती है।

​प्रशासनिक दृष्टिकोण

स्थानीय लोगों का कहना है कि कैराना की इस नई स्वादिष्ट पहचान से न केवल क्षेत्र के कारीगरों को रोजगार मिलेगा, बल्कि कस्बे की छवि में एक सकारात्मक और ऐतिहासिक बदलाव भी आएगा।अब कैराना का नाम पलायन से नहीं, बल्कि मेहमाननवाजी और लजीज व्यंजनों के लिए जाना जाएगा।

जिला उद्योग उपायुक्त ने ये बताया 

जिला उद्योग उपायुक्त रतिका गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा,जो नई योजना प्रारंभ की गई है एक जनपद एक व्यंजन योजना इसमें जनपद शामली से पहले चरण में गुड़ को शामिल किया गया था,उसके बाद इसमें पलंगतोड़ मिठाई और चाट को भी शामिल किया गया है।इसी क्रम में हम अपने उद्यमियों को जो है इवेंट्स होने हैं। 27 से 29 जून तक यह कार्यक्रम आयोजित हो रहा है।गौर करें तो 27 जून को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस हर साल मनाया जाता है,उसी क्रम में जिले के उद्यमी साधु स्वीट्स कैराना को इसके लिए चयनित किया गया है।


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