होर्मुज ने दिया कड़ा सबक,क्या अब बदलेगा तेल और गैस का पूरा खेल:धनंजय सिंह 


होर्मुज ने दिया कड़ा सबक,क्या अब बदलेगा तेल और गैस का पूरा खेल:धनंजय सिंह 

धनंजय सिंह | 28 Jun 2026

 

लखनऊ।ईरान संकट के दौरान विश्व की सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी सप्लाई लाइन मानी जाने वाली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कुछ समय के लिए बंद हुई तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट एक बार फिर अस्थिर हो गया।कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उछाल ने यह याद दिलाया कि विश्व आज भी ऊर्जा के मामले में कितना संवेदनशील है।हालांकि होर्मुज के दोबारा खुलने के बाद आपूर्ति सामान्य हो गई,लेकिन इस संकट ने कई देशों को अपनी लंबी अवधि की ऊर्जा रणनीति पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

इतिहास बताता है कि ऐसे संकट से केवल कुछ महीनों की परेशानी नहीं आती है,बल्कि आने वाले दशकों की ऊर्जा नीति भी तय करती है।इतिहास पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि हर झटके के बाद एनर्जी पॉलिसी में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिले।अब ईरान संकट को तेल गैस क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे गंभीर झटका माना गया है तो ये तय है कि आने वाले समय में विश्व के देश अपनी एनर्जी पॉलिसी में बड़े बदलाव करने जा रहे हैं।

1973 का अरब तेल प्रतिबंध के समय अरब देशों ने इज़राइल का समर्थन करने वाले अमेरिका और पश्चिमी देशों को तेल की आपूर्ति रोक दी थी।नतीजा यह हुआ कि कुछ ही समय में तेल की कीमतें लगभग चार गुना बढ़ गईं और पूरे विश्व को महंगाई ने अपने चपेट में ले लिया।इसके बाद विश्व ने केवल अधिक तेल खरीदने की कोशिश नहीं की,बल्कि ऊर्जा बचाने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़े कदम उठाए। अमेरिका में छोटे और अधिक ईंधन-कुशल जापानी वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी।यूरोप ने डीजल इंजन अपनाने पर जोर दिया,जबकि भारी उद्योगों ने फ्यूल ऑयल की जगह कोयला और गैस का इस्तेमाल बढ़ाया।इसी दौर में 1974 में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी का गठन हुआ,इसका उद्देश्य तेल आपूर्ति संकट के समय सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करना और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार विकसित करना था।

आज का ईरान संकट भी कुछ वैसी ही परिस्थितियों को पैदा करता हुआ दिखाई दे रहा है,लेकिन एक बड़ा अंतर है कि 1970 के दशक में तेल के विकल्प बेहद सीमित थे,जबकि आज रीन्यूएबल एनर्जी,इलेक्ट्रिक वाहन,बैटरी स्टोरेज और परमाणु ऊर्जा जैसे विकल्प पहले से कहीं अधिक व्यावहारिक और प्रतिस्पर्धी हो चुके हैं।साफ है कि ईरान संकट पूरे तेल और गैस सेक्टर की दिशा तय करेगा।

होर्मुज संकट का सबसे ज्यादा असर एशिया पर पड़ा,क्योंकि यह क्षेत्र अपने लगभग 60 प्रतिशत तेल और गैस आयात के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है।संकट के दौरान कई एशियाई देशों ने चार-दिवसीय कार्य सप्ताह,अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम, हवाई और सड़क यात्रा पर प्रतिबंध जैसे अस्थायी कदम उठाए।कुछ उद्योगों को ऊर्जा की कमी के कारण उत्पादन भी घटाना पड़ा।हालांकि ये आपातकालीन उपाय थे,लेकिन अब सरकारें इससे आगे की सोच रही हैं।

भारत और जापान जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश अब घरेलू रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने,स्थानीय ऊर्जा स्रोत विकसित करने और सौर,पवन और परमाणु ऊर्जा में निवेश तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।ऊर्जा सुरक्षा अब केवल सस्ती ऊर्जा का सवाल नहीं रह गई है,बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का मुद्दा बन चुकी है।

एनर्जी सेक्टर में निवेश का रुख भी बदल रहा है। 2026 में वैश्विक ऊर्जा निवेश 3.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है,जो 2025 की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है।इस निवेश का बड़ा हिस्सा अब केवल तेल और गैस पर नहीं,बल्कि स्वच्छ ऊर्जा,ऊर्जा दक्षता और मजबूत एनर्जी इंफ्रा पर खर्च हो रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती बिक्री भी इसी बदलाव की कहानी कहती है‌। 2026 की पहली तिमाही में यूरोप में ईवी बिक्री 30 प्रतिशत,लैटिन अमेरिका में 75 प्रतिशत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 80 प्रतिशत बढ़ी।वहीं चीन से अफ्रीका को सोलर पैनल निर्यात 120 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया को 150 प्रतिशत तक बढ़ गया।अफ्रीका के 15 देशों में केवल पहली तिमाही के दौरान 40 करोड़ डॉलर से अधिक के सौर उपकरण आयात किए गए,जबकि 2025 में यह आंकड़ा 65 करोड़ डॉलर था।आने वाले समय में इसमें और रफ्तार दिखने का अनुमान जताया जा रहा है।

इसके बावजूद तेल और गैस का महत्व तुरंत समाप्त होने वाला नहीं है।परिवहन,कृषि,निर्माण और बढ़ती बिजली मांग में इनकी भूमिका अभी भी बेहद अहम है,लेकिन दिशा बदलती हुई दिखाई दे रही है। बीते सौ वर्षों में जीवाश्म ईंधन की खपत लगातार बढ़ती रही,जबकि अब विश्व ऊर्जा सुरक्षा, विविध स्रोतों और स्वच्छ विकल्पों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।कुल मिलाकर पूरे विश्व के देश अब एनर्जी पर आत्मनिर्भर होने की तरफ बढ़ेंगे और उन एनर्जी उत्पादों पर फोकस करेंगे,जो आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद करेगी।

संभव है कि भविष्य में इतिहास 2026 के ईरान संकट को केवल तेल की कीमतों में आई एक और उछाल के रूप में नहीं, बल्कि उस मोड़ के रूप में याद करे,जहां विश्व ने पहली बार बड़े पैमाने पर यह तय करना शुरू किया कि ऊर्जा का भविष्य केवल अधिक तेल नहीं,बल्कि अधिक सुरक्षित, विविध और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था होगी।


add

अपडेट न्यूज


भारत से सुपरहिट
Beautiful cake stands from Ellementry

Ellementry

© Copyright 2019 | Vanik Times. All rights reserved