दिल्ली में आग से होने वाली मौतों का बढ़ा आंकड़ा,6 महीने में 69 लोगों की हुई मौत


दिल्ली में आग से होने वाली मौतों का बढ़ा आंकड़ा,6 महीने में 69 लोगों की हुई मौत

मनोज बिसारिया | 03 Jul 2026

 

नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल जून में आग लगने की घटनाओं की संख्या में कमी दर्ज की गई,लेकिन आग से मौतों ने पिछले सभी महीनों के साथ-साथ जून 2025 का रिकॉर्ड तोड़ दिया।दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) के 30 जून 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि इस साल जनवरी से लेकर जून तक आग लगने की 12,214 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 69 लोगों की मौत हो चुकी है और 494 लोग झुलसकर घायल हुए हैं,इनमें अकेले जून महीने में 25 लोगों की मौत हुई,जो साल 2026 के किसी भी महीने में सबसे अधिक है।

डीएफ‌एस से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 

दिल्ली फायर सर्विस से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून में आग लगने की कुल 2,111 कॉल प्राप्त हुईं।यह संख्या मई के मुकाबले कम है।मई में विभाग को आग लगने की 3,410 कॉल मिली थीं,जो इस साल किसी भी महीने में सबसे अधिक थीं।हालांकि घटनाओं की संख्या घटने के बावजूद जून में जानमाल का नुकसान सबसे अधिक रहा। 2026 के मासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में आग की घटनाओं में छह लोगों की मौत हुई थी,फरवरी में भी छह लोगों की मौत हुई थी।मार्च में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 पहुंच गई,जबकि अप्रैल में पांच और मई में 12 लोगों की मौत हुई,इसके बाद जून में 25 लोगों की मौत ने पूरे साल का सबसे भयावह आंकड़ा सामने ला दिया।

सुरक्षा मानकों का पालन बड़ी चुनौती

जून में मौतों की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा कारण 3 जून को मालवीय नगर के फ्लोरिस स्टे होटल में लगी भीषण आग रही,इसमें 23 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई,जबकि 26 से अधिक लोग घायल हो गए।इस घटना ने पूरे महीने के मृत्यु आंकड़ों को असाधारण रूप से बढ़ा दिया और राजधानी दिल्ली में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।दिल्ली में इस साल सबसे दर्दनाक अग्निकांडों पर नजर डालें तो मालवीय नगर होटल हादसा अकेला मामला नहीं है। इससे पहले विवेक विहार में एक मकान में लगी आग में नौ लोगों की मौत हुई थी,पालम में एक बहुमंजिला इमारत में आग लगने से भी एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हुई थी। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट किया है कि रिहायशी इमारतों और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

आग से मौत का टूटा बीते साल का रिकार्ड

साल 2025 के आंकड़ों से तुलना करें तो स्थिति और भी चिंताजनक दिखाई देती है। 2025 के मई महीने में दिल्ली फायर सर्विस को आग लगने की 1,800 कॉल प्राप्त हुई थीं। चार लोगों की मौत हुई थी और 71 लोग घायल हुए थे। वहीं जून में आग लगने की 1,780 कॉल दर्ज हुई थीं,जिनमें 12 लोगों की मौत और 41 लोग घायल हुए थे।इसके मुकाबले जून 2026 में कॉल की संख्या बढ़कर 2,111 हो गई और मृतकों की संख्या दोगुनी से भी अधिक होकर 25 पहुंच गई।

छह महीने में ही 12,214 कॉल दर्ज

पूरे साल 2025 में दिल्ली फायर सर्विस को आग लगने की कुल 17,366 कॉल प्राप्त हुई थीं,इसमें 71 लोगों की मौत हुई थी और 529 लोग घायल हुए थे।इसके विपरीत 2026 का अभी केवल आधा वर्ष ही पूरा हुआ है,लेकिन छह महीनों में ही 12,214 कॉल दर्ज हो चुकी हैं।वहीं मृतकों की संख्या 69 पहुंच गई है और घायलों की संख्या 494 हो चुकी है,जो यह संकेत देती है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो 2026 आग से होने वाले नुकसान के लिहाज से पिछले वर्षों के रिकॉर्ड पीछे छोड़ सकता है।

डीएफएस ने मौतों के पीछे बताए ये कारण

दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने बताया कि अधिकांश गंभीर आग की घटनाओं के पीछे शॉर्ट सर्किट प्रमुख कारण बनकर सामने आया है।मलिक का कहना है कि खराब वायरिंग,बिजली के तारों पर अत्यधिक लोड, पुराने विद्युत उपकरणों का उपयोग व रखरखाव में लापरवाही जैसी छोटी-छोटी गलतियां बड़े हादसों में बदल जाती हैं।मलिक ने कहा कि रात के समय आग लगने की स्थिति सबसे अधिक खतरनाक होती है,क्योंकि लोगों को समय रहते इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है,जब तक लोगों को आग का पता चलता है, तब तक लपटें तेजी से फैल चुकी होती हैं और बाहर निकलने का रास्ता बंद हो जाता है।

हर भवन में अनिवार्य हो फायर डिटेक्टर और स्प्रिंकलर

एके मलिक ने कहा कि प्रत्येक घर व इमारत में फायर डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए जाने चाहिए।फायर डिटेक्टर से आग लगने की शुरुआती सूचना तुरंत मिल सकती है, जबकि स्प्रिंकलर आग को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करने में मदद करते हैं।दिल्ली सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भी भेजा गया है,जिसमें हर घर व भवन में फायर डिटेक्टर तथा स्प्रिंकलर सिस्टम अनिवार्य किए जाने की सिफारिश की गई है।


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