ईरान-अमेरिका टकराव से बिगड़े हालात,सीएनजी और रसोई गैस के फिर से बढ़ेंगे दाम


ईरान-अमेरिका टकराव से बिगड़े हालात,सीएनजी और रसोई गैस के फिर से बढ़ेंगे दाम

मनोज बिसारिया | 08 Jul 2026

 

नई दिल्ली।अमेरिका और ईरान में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है।अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में तीन पोतों पर हमले किए हैं।इस हमले से विश्व में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है।इसी दौरान कतर के से भारत आ रहे एक एलएनजी टैंकर पर भी ड्रोन हमले की खबर है। अब सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में भारत में एलपीजी, सीएनजी,पीएनजी समेत अन्य तरह की गैस महंगी हो सकती है।

जानें होर्मुज स्ट्रेट के मायने

बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट से विश्व के लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल और भारी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई होती है।भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी जरूरत आयातित एलएनजी से पूरी करता है और इसमें कतर सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।कतर से आने वाली अधिकतर एलएनजी होर्मुज से होकर गुजरात के दहेज जैसे टर्मिनलों तक पहुंचती है।ताजा घटनाक्रम में कम से कम चार तेल और गैस टैंकर वापस लौट चुके हैं।इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड 6 प्रतिशत तक बढ़कर लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल हो गया,जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में भी भारी उछाल आया,क्योंकि व्यापारियों ने लंबे समय तक आपूर्ति में रुकावट की संभावना को ध्यान में रखा।

निवेशकों को डर है कि शिपिंग पर नए हमलों से होर्मुज के रास्ते ऊर्जा का प्रवाह धीमा हो सकता...

निवेशकों को डर है कि शिपिंग पर नए हमलों से होर्मुज के रास्ते ऊर्जा का प्रवाह धीमा हो सकता है,भले ही होर्मुज तकनीकी रूप से खुला रहे।ईरान संकेत दे रहा है कि वह खाड़ी देशों के प्रस्तावित वैकल्पिक शिपिंग कॉरिडोर का विरोध करेगा और उन जहाजों को निशाना बनाना जारी रख सकता है,जो उसके पसंदीदा तरीकों को छोड़कर दूसरे रास्ते अपनाते हैं।

क्या भारतीय ग्राहकों पर पड़ेगा असर

पेट्रोल और डीजल के उलट सीएनजी और पीएनजी की कीमतें न सिर्फ घरेलू गैस उत्पादन से बल्कि आयातित एल‌एनजी की लागत से भी प्रभावित होती हैं। अगर ज्यदा फ्रेट रेट,इंश्योरेंस कॉस्ट या सप्लाई की कमी के कारण एल‌एनजी कार्गो महंगे हो जाते हैं तो शहर में गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को आखिरकार ज्यादा खरीद लागत का सामना करना पड़ सकता है।इसका असर गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी,घरों में सप्लाई होने वाली पीएनजी और इंडस्ट्रीज,कमर्शियल यूजर्स को सप्लाई होने वाली गैस पर पड़ सकता है।हालात इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है,क्योंकि अमेरिका ने ईरान को दी गई तेल निर्यात संबंधी अस्थायी छूट भी वापस ले ली है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।


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