नई दिल्ली।डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयान से अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते की खत्म होने की आशंका है। ट्रंप बयान से बुधवार को भारतीय शेयर बाजार भरभरा गया। सेंसेक्स और निफ्टी इंट्रा-डे के दौरान दो प्रतिशत से अधिक टूट गए। बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान 1900 अंक तक लुढ़ककर 76300 अंक के नीचे ट्रेड करने लगा। वहीं, एनएसई निफ्टी 550 अंक से ज्यादा टूटकर 23800 अंक के नीचे था।
बीमार मानसिकता वाले लोग…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के साथ अंतरिम समझौता समाप्त हो गया है,लेकिन वह बातचीत जारी रहने देंगे।ट्रंप ने युद्धविराम की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर कहा,मुझे लगता है कि यह समाप्त हो गया है,उनके साथ बात करना समय की बर्बादी है।खाड़ी में नए हमलों के कारण नाजुक सीजफायर के टूटने का खतरा पैदा होने के बाद ट्रंप ने ईरान के नेताओं को बीमार मानसिकता वाले लोग बताया।ट्रंप ने पत्रकारों से कहा,वे घटिया लोग हैं,वे बीमार मानसिकता वाले लोग हैं,उनका नेतृत्व बीमार मानसिकता वाले लोग कर रहे हैं।जहां तक मेरी बात है, उनसे निपटना सिर्फ समय की बर्बादी है।
कच्चे तेल की कीमतें
इस तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं।बुधवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर $78.09 प्रति बैरल हो गया जबकि WTI क्रूड फ्यूचर्स बढ़कर लगभग $74 प्रति बैरल हो गया। दरअसल इस नए तनाव ने होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आपूर्ति में रुकावट की आशंकाओं को हवा दी है। इसी तरह जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने के बीच ग्लोबल मार्केट में हुई जबरदस्त बिकवाली का असर दलाल स्ट्रीट पर भी दिखा। ट्रंप के बयानों के बाद यूरोपियन मार्केट में गिरावट आई। UK का FTSE 100, फ्रांस का CAC 40 और जर्मनी का DAX 2 प्रतिशत तक गिर गए। इसके अलावा एशिया में जापान का निक्केई 1.5 प्रतिशत गिरा जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया,क्योंकि चिप सेक्टर में बिकवाली तेज हो गई। इससे पहले वॉल स्ट्रीट में भी जबरदस्त गिरावट के बाद, डाऊ जोन्स फ्यूचर्स में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो संकेत देता है कि US मार्केट की शुरुआत भी कमजोर हो सकती है।
इस माहौल में US ट्रेजरी यील्ड में हुई बढ़ोतरी
इस माहौल में US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई,जिससे इक्विटी पर दबाव बढ़ा। बेंचमार्क 10-साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.565 प्रतिशत हो गई जबकि 30-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.068 प्रतिशत तक पहुंच गई। आमतौर पर बॉन्ड यील्ड बढ़ने से फिक्स्ड-इनकम, एसेट्स इक्विटी के मुकाबले अधिक आकर्षक हो जाते हैं,जिससे निवेशक स्टॉक जैसे जोखिम भरे एसेट्स से दूर होने लगते हैं।भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 95.50 के स्तर से नीचे गिरकर कमज़ोर हुआ। पिछले क्लोज से इसमें 0.6 प्रतिशत की गिरावट आई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मजबूत होने का असर घरेलू करेंसी पर पड़ा।