नई दिल्ली।अमेरिका की बड़ी कंपनियों ने चेतावनी दी है।इन कंपनियों को भी लगता है कि भारत से टैरिफ के मसले पर उलझना बैकफायर कर सकता है।अमेरिकी दिग्गजों समेत कई टॉप कंपनियों ने USTR को चेतावनी दी है।उन्होंने कहा है कि भारत समेत 60 देशों पर 12.5 फीसदी तक का एडिशनल टैरिफ लगाने से कंज्यूमर्स और बिजनेस के लिए लागत बढ़ जाएगी।इनमें से कई कंपनियों ने कुछ खास प्रोडक्ट्स के लिए छूट की मांग की है।
जानें इंटेल ने क्या कहा
इंटेल ने कहा,इसका असल असर यह होगा कि अमेरिका में सामान बनाना दूसरी जगहों के मुकाबले महंगा हो जाएगा। घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के एडमिनिस्ट्रेशन के टारगेट के यह बिल्कुल उलट है। IBM,डॉव केमिकल्स थाईलैंड और GE अप्लायंसेज ने भी इस कदम का विरोध किया।
जानें डेल टेक्नोलॉजीज ने क्या कहा
डेल टेक्नोलॉजीज ने कहा,डेल उन पॉलिसी टूल्स का इस्तेमाल करने के महत्व पर जोर देना चाहती है,जिनसे एडमिनिस्ट्रेशन के अच्छे लक्ष्यों को हासिल किया जा सके,बिना प्रोडक्शन और एंड-यूजर की लागत को तेजी से बढ़ाए या जरूरी प्रोडक्ट्स और कंपोनेंट्स के ऑपरेशन में देरी का जोखिम उठाए।
इंपोर्ट पर अपनी निर्भरता की ओर किया इशारा
हनीवेल एयरोस्पेस ने जरूरी मिनरल्स,रेयर अर्थ,क्रिटिकल मेटल्स, मेटल वाले एयरोस्पेस इनपुट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स, चिप्स,डिस्प्ले और खास कमर्शियल कंपोनेंट्स जैसे मुश्किल से मिलने वाले कंपोनेंट्स के लिए इंपोर्ट पर अपनी निर्भरता की ओर इशारा किया। कहा,टैरिफ से मुख्य रूप से एयरोस्पेस प्रोडक्ट्स के रखरखाव और प्रोडक्शन की लागत बढ़ेगी, न कि सोर्सिंग में बदलाव की प्रक्रिया तेज होगी।
जानें डी बीयर्स ने क्या कहा
इंपोर्ट पर अमेरिका की निर्भरता को देखते हुए डी बीयर्स ने कहा,नेचुरल डायमंड्स पर अतिरिक्त ड्यूटी से मुख्य रूप से अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स, रिटेलर्स और कंज्यूमर्स के लिए लागत बढ़ेगी, न कि घरेलू स्तर पर विकल्प खोजने को बढ़ावा मिलेगा।
जानें फोर्ड ने क्या कहा
फोर्ड ने कहा कि वह उन चार प्रोडक्ट कैटेगरीज के लिए छूट का समर्थन करती है,जिन पर पहले से ही सेक्शन 232 के तहत 50 फीसदी तक टैरिफ लग रहा है।कंपनी का तर्क है कि सेक्शन 301 के तहत अतिरिक्त टैरिफ से अमेरिकी ऑटो मैन्युफैक्चरिंग पर बहुत ज्यादा और भारी बोझ वाली लागत आएगी। जबकि इससे जबरन मजदूरी से जुड़े तौर-तरीकों को खत्म करने में कोई खास मदद नहीं मिलेगी।
एक्स्ट्रा टैरिफ पर विचार करने की अपील
इस बीच भारत ने अमेरिका से नई दिल्ली पर 12.5 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने करने के लिए कहा है।यह प्रस्ताव जबरन मजदूरी से बने सामान के इंपोर्ट को रोकने में विफलता के कारण दिया गया था।भारत ने बातचीत के जरिए किसी भी खास चिंता को दूर करने के लिए यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के साथ जुड़ने की इच्छा भी जताई है। भारत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर जबरन कराए गए काम से बने सामान के आयात पर रोक नहीं है और साथ ही दूसरी कानूनी जरूरतों के सबूत भी नहीं दिए गए हैं तो इसे इस कानून की धारा 301 के तहत अनुचित नहीं माना जा सकता।
भारत ने जांच के तरीकों पर उठाए सवाल
भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने जिन 60 अर्थव्यवस्थाओं की जांच की,उनके कानूनों और तौर-तरीकों का अर्थव्यवस्था-के-हिसाब-से कोई विश्लेषण नहीं किया। इसके बजाय उसने बिना यह देखे कि संबंधित अर्थव्यवस्थाएं कौन से खास उपाय लागू कर रही हैं,एकतरफा तौर पर यह तय कर लिया कि ऐसे सभी तरीके नाकाफी हैं।
भारत के मामले में इस बात के लिए नाकाफी और अपर्याप्त सबूत
इसने आगे कहा कि भारत के मामले में इस बात के लिए नाकाफी और अपर्याप्त सबूत हैं कि जबरदस्ती कराए गए काम से बने सामान के आयात पर रोक न होने से अमेरिकी उद्योग को नुकसान पहुंचाने वाला कोई अनुचित फायदा मिलता है।भारत से अमेरिका को होने वाले प्रमुख निर्यात वाले क्षेत्रों के सबूतों से जबरदस्ती कराए गए काम से बने सामान के इनपुट के साथ कोई संबंध नहीं दिखता है। USTR की ओर से दिए गए सबूत, जबरन कराए गए काम से बने सामान के आयात पर रोक न होने और अमेरिकी व्यापार पर इसके असर के बीच जरूरी कारण-और-प्रभाव वाला संबंध साबित नहीं करते हैं।