अर्थव्यवस्था विदेश व्यापार नीति में बड़ा बदलाव,मोदी सरकार ने लगाई फोर्स्ड लेबर से बने सामान के आयात पर रोक


अर्थव्यवस्था विदेश व्यापार नीति में बड़ा बदलाव,मोदी सरकार ने लगाई फोर्स्ड लेबर से बने सामान के आयात पर रोक

मनोज बिसारिया | 14 Jul 2026

 

नई दिल्ली।केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने  विदेश व्यापार नीति में अहम बदलाव का ऐलान किया है। मोदी सरकार ने मंगलवार को विदेश व्यापार नीति (FTP), 2023 में बदलाव करते हुए जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगा दी है। मोदी सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में किया गया है, जब अमेरिका भारत समेत 60 देशों में जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है।

जानें मोदी सरकार ने क्या कहा 

नरेंद्र मोदी सरकार ने नीति में नया प्रावधान जोड़ते हुए कहा है कि अगर कोई सामान पूरी तरह या उसका कोई हिस्सा जबरन मजदूरी से तैयार किया गया है, तो उसका भारत में आयात नहीं किया जा सकेगा। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने कल  सोमवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। यह नया नियम गजट में प​ब्लिश होने के 30 दिन बाद लागू होगा।

अमेरिकी जांच के बीच मोदी सरकार का कदम

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय भारत समेत 60 देशों के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत जांच कर रहा है।अमेरिका का आरोप है कि ये देश जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक संबंधी नियमों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर 3 जून को अमेरिका ने भारत सहित 54 देशों से आयात होने वाले सामान पर 12.5 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। वहीं कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मेक्सिको और पाकिस्तान से आने वाले सामान पर 10 फीसदी अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का भी प्रस्ताव दिया गया था।

सरकार को रोक लगाने का अधिकार

संशोधित विदेश व्यापार नीति के तहत मोदी सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि यदि जांच या किसी अन्य ठोस सबूत से यह पता चलता है कि कोई सामान जबरन मजदूरी से बनाया गया है, तो वह अधिसूचना जारी कर उसके आयात पर कभी भी रोक लगा सकती है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने कहा कि ऐसी जांच कैसे की जाएगी, इसकी प्रक्रिया हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर्स 2023 में तय की जाएगी। 

ILO मानकों के अनुरूप होगी डेफिनिशन

DGFT ने विदेश व्यापार नीति 2023 के अध्याय-11 में जबरन मजदूरी की डेफिनिशन भी जोड़ी है। नीति के अनुसार यदि किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के बिना,सजा,डर या दबाव दिखाकर कोई काम या सेवा कराई जाती है, तो उसे जबरन मजदूरी माना जाएगा। यह डेफिनिशन अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के 1930 के फोर्स्ड लेबर कन्वेंशन (संख्या-29) के अनुरूप रखी गई है।


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