भीषण गर्मी क्या रोक देगी भारत की विकास दर, विश्व बैंक का दावा,अर्थव्यवस्था व नौकरियों पर बड़ा खतरा


भीषण गर्मी क्या रोक देगी भारत की विकास दर, विश्व बैंक का दावा,अर्थव्यवस्था व नौकरियों पर बड़ा खतरा

मनोज बिसारिया | 31 Jul 2026

 

 नई दिल्ली।भारत के लिए लगातार बढ़ती भीषण गर्मी सिर्फ मौसम का मिजाज भर नहीं है,बल्कि यह अब देश की आर्थिक बढ़त और रोजगार के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट ए लिवेबल फ्यूचर प्रोटेक्टिंग जॉब्स एंड ग्रोथ फ्रॉम एक्सट्रीम हीट इन साउथ एशियाज सिटीज में चेतावनी दी गई है कि अगर समय रहते गर्मी से निपटने के उपाय नहीं बढ़ाए गए तो इसका सीधा असर लोगों के काम करने की क्षमता, बुनियादी ढांचे और शहरों के विकास पर पड़ेगा।

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 में भीषण गर्मी से भारत को करीब 247 अरब संभावित कार्य-घंटों का नुकसान उठाना पड़ा।देश को लगभग 194 अरब डॉलर की कमाई का झटका लगा। इस नुकसान की सबसे ज्यादा मार खेती और निर्माण क्षेत्र पर पड़ी है।गंवाए गए कुल कार्य-घंटों में से अकेला कृषि क्षेत्र 66 फीसदी नुकसान का शिकार बना, जबकि कंस्ट्रक्शन सेक्टर को 20 फीसदी की चपत लगी।दक्षिण एशिया के स्तर पर देखें तो गर्मी के कारण कम उत्पादकता से हर साल करीब 3.1 करोड़ पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर नुकसान हो रहा है।

रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि अगर सही कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक दक्षिण एशिया की जीडीपी करीब 7 प्रतिशत तक गिर सकती है। 2050 तक दक्षिण एशिया के शहरों में लगभग 28 करोड़ नए कामकाजी उम्र के लोग जुड़ेंगे, लेकिन शहरों के कंक्रीट के जंगल और छायादार पेड़ों की कमी के चलते अर्बन हीट आइलैंड का असर इस संकट को और गहरा कर रहा है।

गर्मी का कहर सिर्फ इंसानी शरीर तक सीमित नहीं है, यह बुनियादी ढांचे की भी कमर तोड़ रहा है। मई 2024 में भारत में बिजली की मांग रिकॉर्ड 156 अरब यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत ज्यादा थी। इसका एक बड़ा कारण कूलिंग उपकरणों की बढ़ती बिक्री है, 2023 से 2024 के बीच एयर-कंडीशनर की बिक्री में 34 प्रतिशत का उछाल देखा गया।

रिपोर्ट बताती है कि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाते ही पावर कट की घटनाएं 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती हैं और बिजली गुल रहने का समय भी 15 से 60 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।इसके अलावा अत्यधिक तापमान से बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंच रहा है। 

रिपोर्ट में मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे को गर्मी से हुए नुकसान का जिक्र किया गया है। साथ ही आशंका जताई गई है कि 2030 तक दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तापमान साल में कई दिनों तक 50 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंच सकता है। इस कारण टेक-ऑफ के समय विमानों को यात्रियों या सामान का वजन घटाना पड़ सकता है।

गर्मी का स्वास्थ्य पर भी भयावह असर हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में महज पांच दिनों की एक हीटवेव के दौरान करीब 30,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की जाती हैं,जो कि आधिकारिक लू से होने वाली मौतों के आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। इसका सबसे बुरा असर सड़कों और खुले में काम करने वाले छोटे व्यवसायियों पर पड़ रहा है। दिल्ली के स्ट्रीट वेंडरों पर 2025 में हुए एक सर्वे के मुताबिक 90 फीसदी विक्रेताओं ने माना कि गर्मी के कारण उन्हें अपने काम के घंटे घटाने पड़े, जबकि 72 फीसदी को गर्मी से सामान खराब होने के चलते आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

इन चुनौतियों के बीच विश्व बैंक ने कहा है कि भारत के लिए टिकाऊ कूलिंग के क्षेत्र में 2040 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर का बड़ा निवेश अवसर मौजूद है। अगर देश में किफायती कूलिंग उपकरण बनाने के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए, तो इससे 37 लाख नए रोजगार पैदा हो सकते हैं।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकार को नई योजनाएं बनाने के बजाय प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे मौजूदा कार्यक्रमों में ही पैसिव कूलिंग के तरीके शामिल करने चाहिए, खुले में काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा नियम सख्त करने चाहिए और लू को आपदा घोषित करना चाहिए। इसके साथ ही शहरों में गर्मी से बचाव के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली पर खर्च किया गया हर 1 डॉलर लगभग 50 डॉलर के बराबर का फायदा वापस लौटाता है।


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