कच्चा तेल 1.6% तक टूटा,मांग में दिखा सुस्ती का असर, आगे और होगा सस्ता


कच्चा तेल 1.6% तक टूटा,मांग में दिखा सुस्ती का असर, आगे और होगा सस्ता

मनोज बिसारिया | 13 Aug 2026

 

नई दिल्ली।वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की मांग कमजोर रहने के अनुमान से गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली।ब्रेंट में लगभग 1.5 फीसदी और WTI क्रूड में 1.6 फीसदी की नरमी आई।हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को ले​कर अनि​श्चितता बनी हुई और ऊर्जा आपूर्ति में रुकावट की भी आशंका बनी हुई है।बाजार के जानकार मानते हैं कि यह कहना मुश्किल है कि प​श्चिम ए​शिया संकट कितना लंबा चलेगा,लेकिन जब तक कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित रहेगी, कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है।

कच्चे तेल में हल्की कमजोरी

इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.29 डॉलर यानी 1.5 फीसदी गिरकर 87.69 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1.30 डॉलर यानी 1.6 फीसदी की गिरावट के साथ 81.97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

ओपेक ने घटाया डिमांड बढ़ने का अनुमान

ओपेक ने बुधवार को जारी अपनी मंथली रिपोर्ट में 2026 के लिए ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ का अनुमान घटाकर 5.80 लाख बैरल प्रतिदिन कर दिया।अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने भी इस साल क्रूड की खपत में 16 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आने का अनुमान जताया है। पिछले महीने एजेंसी ने खपत में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट का अनुमान लगाया था।अमेरिका-इजरायल के ईरान के साथ युद्ध की वजह से फ्यूल सप्लाई सीमित हुई है और कीमतें बढ़ी हैं। इससे मांग पर असर पड़ा है।

अमेरिकी भंडार बढ़ने से भी दबाव

अमेरिका में कच्चे तेल का कमर्शियल स्टॉक अप्रत्याशित रूप से बढ़ने से भी कीमतों पर दबाव पड़ा।अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक एक्सपोर्ट घटने के कारण बीते हफ्ते कच्चे तेल के भंडार में जनवरी 2023 के बाद की सबसे बड़ी वीकली बढ़ोतरी दर्ज की गई। 7 अगस्त को खत्म हफ्ते में अमेरिकी कच्चा तेल भंडार 1.74 करोड़ बैरल बढ़कर 42.44 करोड़ बैरल हो गया। यह 5 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इसके उलट रॉयटर्स के सर्वेक्षण में विश्लेषकों ने भंडार में 14 लाख बैरल की कमी का अनुमान लगाया था।

आगे और सस्ता होगा क्रूड

खाड़ी क्षेत्र में युद्ध समाप्त कराने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं होने से कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। PL कैपिटल में रिसर्च के को-हेड स्वर्णेंदु भूषण ने कहा कि ऐसा नहीं लगता कि अमेरिका के ईरान पर हमले और ईरान के जवाबी हमले और इसे और ज्यादा पड़ोसी देशों तक फैलाने से मिडिल ईस्ट का संकट खत्म होगा।दरअसल यह इलाका दुनिया के कुल ऑयल प्रोडक्शन का करीब 30% हिस्सा है,जबकि होर्मुज से दुनिया की ऑयल की डिमांड का 14-15 मिलियन बैरल प्रति दिन और रिफाइंड प्रोडक्ट्स का 5-6 mnbopd हिस्सा आता है। इस इलाके में बड़े स्टोरेज टर्मिनल, गैस प्रोडक्शन और ऑयल रिफाइनरियां भी हैं।हालांकि यह कहना मुश्किल है कि युद्ध की स्थिति कितनी लंबी और कितनी गंभीर होगी,लेकिन जब तक क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित रहेगी, तेल की कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है।

सरकारी ऑयल कंपनियां पर ऊंची कीमतों का असर

स्वर्णेंदु भूषण कहते हैं हायर ऑयल प्राइसेज के चलते पहले से ही नुकसान उठा रही ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की स्थिति और खराब कर देंगी और अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो उन पर दबाव बने रहने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर अपस्ट्रीम कंपनियों की फाइनेंशियल कंडीशन बेहतर होने की संभावना है,लेकिन वॉल्यूम में कोई बड़ी स्ट्रक्चरल ग्रोथ स्टोरी न होने के कारण उनके बहुत अच्छा परफॉर्मेंस न करने की संभावना कम है।


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