नई दिल्ली।काले समुद्र में रूस और यूक्रेन के बीच मचे घमासान से भारत में सूरजमुखी तेल का आयात बाधित हो गया है।आयातकों ने आने वाली त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए सोयाबीन तेल का आयात बढ़ा दिया है,जिससे सोयाबीन तेल का आयात अगस्त में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।इसका असर खाद्य तेल की कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात बढ़कर 6,20,000 मीट्रिक टन होने की संभावना
खाद्य तेल कारोबारियों से मिली जानकारी के मुताबिक अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात बढ़कर 6,20,000 मीट्रिक टन होने की संभावना है।मौजूदा मार्केटिंग ईयर (जो नवंबर में शुरू होता है) में अब तक के 4,24,549 टन के औसत मासिक आयात से लगभग 46 फीसदी अधिक है।
काला सागर में रुस -यूक्रेन घमासान से बाधित हुआ व्यापार
भारत अपनी खपत का सूरजमुखी तेल आयात का अधिकांश हिस्सा रूस और यूक्रेन से करता है।अगस्त में भारत का सूरजमुखी तेल के आयात में रूस और यूक्रेन में मचे घमासान से बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है,ये फरवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर होगा।हाल के महीनों में रूस और यूक्रेन ने काला सागर के आसपास एक-दूसरे के बंदरगाहों और समुद्री बुनियादी ढांचे पर तेजी से हमला कर नुकसान पहुंचाया है।इससे अनाज और वनस्पति तेलों की सप्लाई बाधित हुई है और निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है।
1.40 लाख टन सूरजमुखी तेल की अटकी खेप
काला सागर क्षेत्र से आने वाले और अगस्त-सितंबर में शिपमेंट के लिए निर्धारित करीब 1.40 लाख टन सूरजमुखी तेल की खेपें रूस और यूक्रेन में मचे घमासान से विलंबित हुई हैं। भारत में सूरजमुखी तेल का ज़्यादातर आयात रूस और यूक्रेन से होता है।अगस्त में इसके आयात के घटकर 1,80,000 मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है,ये फरवरी 2026 के बाद सबसे कम और पिछले महीने के मुकाबले 28 फीसदी कम है।
सूरजमुखी की जगह सोया तेल बना विकल्प
आमतौर पर भारत के दक्षिणी भाग में समुद्री मार्ग से किराया कम होने से सोयाबीन के मुकाबले सूरजमुखी तेल कम दामों पर उपलब्ध होने के कारण ज्यादा आयात किया जाता है,लेकिन इस बार सूरजमुखी तेल की आयात बाधित होने से दक्षिणी राज्यों ने भी सोयाबीन तेल आयात करना शुरू कर दिया है।पश्चिमी तट पर कांडला और JNPT बंदरगाहों के साथ-साथ, अब दक्षिण भारत में कृष्णापट्टनम और काकीनाडा बंदरगाहों पर भी सोयाबीन तेल की शिपमेंट आ रही है।
त्योहारी सीजन में महंगा होगा खाद्य तेल
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा,पिछले कुछ महीनो में भारत में पहले पूर्वानुमान के मुताबिक एल नीनो के कारण वर्षा कम होने से उत्पादन घटने की संभावनाएं जताई जा रही थी, इसलिए दामों ने रफ्तार पकड़ ली थी इसके बाद खाड़ी देशों के बीच युद्ध के चलते क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने और इंडोनेशिया द्वारा जैव ईंधन में पाम तेल के उपयोग को बढ़ाने का फैसले के करण पाम तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी ऊपर देखने को मिल रहे हैं और अब सूरजमुखी तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण आने वाले त्योहारी सीजन में भारत के उपभोक्ताओं को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है।
सोयाबीन तेल के बदल गए खरीदारी के ठिकाने
सोयाबीन तेल की कीमतें काफी आकर्षक हैं।साथ ही सूरजमुखी तेल की सप्लाई में भी रुकावटें आ रही हैं। मुंबई की वेजिटेबल ऑयल ब्रोकरेज कंपनी सनविन ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव संदीप बजोरिया ने कहा कि इससे सोयाबीन तेल और भी आकर्षक हो गया है। आमतौर पर भारत सोयाबीन तेल का आयात अर्जेंटीना और ब्राजील से करता है,लेकिन इस बार भारत के सोया तेल की खरीदी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है अब तत्काल आपूर्ति के लिए भारत चीन, मिस्र, थाईलैंड और तुर्की जैसे देशों से भी सोया तेल खरीद रहा है।
कीमत का फायदा
पाम ऑयल के मुकाबले सोयाबीन तेल का प्रीमियम अप्रैल में 100 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से ज़्यादा था, जो अब घटकर लगभग 50 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रह गया है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि खराब मौसम से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका और इंडोनेशिया द्वारा बायोफ्यूल के लिए पाम ऑयल का इस्तेमाल बढ़ाने के कदम से पाम ऑयल की कीमतें बढ़ गई हैं। कम प्रीमियम की वजह से कीमत को लेकर संवेदनशील भारतीय खरीदारों के लिए सोयाबीन तेल ज्यादा आकर्षक हो गया है।