मोबाइल टैरिफ बढ़ने के संकेत, 5G निवेश और बेहतर सेवाओं के लिए ARPU बढ़ाना जरूरी


मोबाइल टैरिफ बढ़ने के संकेत, 5G निवेश और बेहतर सेवाओं के लिए ARPU बढ़ाना जरूरी

मनोज बिसारिया | 25 Aug 2026

 

नई दिल्ली।ऐसे संकेत नजर आ रहे हैं कि आने वाले हफ्तों या महीनों में दूरसंचार शुल्क में बढ़ोतरी हो सकती है।बीते दो सालों से दूरसंचार कंपनियां किसी भी उल्लेखनीय वृद्धि से बच रही हैं,लेकिन अब शायद समय आ गया है कि यह उद्योग अपनी 5जी सेवाओं के मुद्रीकरण और मजबूत कारोबारी प्रदर्शन के लिए शुल्क दरों को उचित बनाने की दिशा में बढ़े। ऐसा कदम उद्योग को अत्याधुनिक नवाचार लाने में सक्षम बनाएगा ताकि वह अपने ग्राहकों की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सके।स्पैम और साइबर सुरक्षा के बढ़ते खतरे के बीच दूरसंचार कंपनियों को केंद्रित निवेश करने की आवश्यकता है ताकि वे उपभोक्ताओं को निर्बाध सेवाएं प्रदान कर सकें।आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और तकनीकी क्षेत्र में तेज बदलावों के समय यह खास तौर पर जरूरी है।

शुल्क वृद्धि से प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) में भी इजाफा होगा। यह दूरसंचार उद्योग का प्रमाणित प्रदर्शन मानक है।पिछली बार जुलाई 2024 में हुई शुल्क वृद्धि से अब तक इस उद्योग का मासिक एआरपीयू 190 रुपये से अधिक और 200 रुपये से कम रहा है।हालिया वित्तीय परिणामों के अनुसार भारती एयरटेल 264 रुपये मासिक एआरपीयू के साथ सबसे ऊपर है। यह दूरसंचार उद्योग की अग्रणी कंपनी रिलायंस जियो के 216 रुपये से अधिक है। तीसरी निजी दूरसंचार कंपनी वी (वोडाफोन आइडिया) का एआरपीयू 177 रुपये के साथ काफी कम है और सरकारी कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) 100 रुपये से कुछ अधिक मासिक एआरपीयू के साथ सबसे नीचे है।

संभावित शुल्क वृद्धि का कारण आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए हाल ही में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल करने वाली जियो की घोषणा है। कंपनी ने कहा है कि वह 299 रुपये वाले शुरुआती दैनिक असीमित डेटा प्लान को बरकरार रखेगी और 300 रुपये के एकमुश्त शुल्क पर जियो प्राइम सदस्यता को फिर शुरू करेगी। चूंकि यह सदस्यता लेने वालों का शुल्क सितंबर 2027 तक नहीं बढ़ेगा, इसलिए माना जा रहा है कि कंपनी जल्द ही शुल्क बढ़ा सकती है। जियो की घोषणा ठीक उसी समय आई, जब भारती एयरटेल ने 299 रुपये वाला शुरुआती प्लान बंद कर दिया और शुल्क वृद्धि पर लगातार जोर देती रही। दोनों अग्रणी कंपनियों ने अलग-अलग रणनीतियों के माध्यम से शुल्क ढांचे में बदलाव का संकेत दिया है।

2019 से अब तक केवल तीन बार शुल्क बढ़ाया गया है, इसलिए अगली बढ़ोतरी की चर्चा दिलचस्पी से की जा रही है। वर्षों से भारत के दूरसंचार शुल्क और इस कारण एआरपीयू दुनिया में सबसे कम रहे हैं। लंबे समय से लगभग 300 रुपये एआरपीयू की वकालत करते रहे भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने इस वर्ष की शुरुआत में एक निवेशक कॉल पर 350 रुपये मासिक एआरपीयू का नया लक्ष्य रखा। वित्तीय दिक्कतों से जूझ रहे और दो कंपनियों के वर्चस्व वाले दूरसंचार उद्योग के लिए यह बहुत जरूरी है। 

भारत का दूरसंचार उद्योग कभी सबसे आशाजनक क्षेत्रों में गिना जाता था और इसमें अंतरराष्ट्रीय कंपनियां आना चाहती थीं मगर पिछले कुछ वर्षों में यह कई झटके झेल चुका है। 2012 में कथित 2जी घोटाले के बाद कई दूरसंचार लाइसेंसों को रद्द किया जाना सबसे बड़ा झटका था।

बढ़े हुए एआरपीयू से दूरसंचार उद्योग भविष्य की तकनीकों में ठोस निवेश कर सकेगा और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे सकेगा। लेकिन शुल्क में बदलाव करते समय उन ग्राहकों को ध्यान में रखना चाहिए जो सस्ती सेवाओं की तलाश में हैं। कम पैठ वाले बाजार और ग्रामीण भारत के लिए खास तौर पर जरूरी है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के नवीनतम आंकड़े दिखाते हैं कि ग्रामीण भारत में वायरलेस (मोबाइल) दूरसंचार घनत्व केवल 59.46 प्रतिशत है। यहां वृद्धि की बहुत संभावना है लेकिन उसकी कुंजी सुलभता होगी।


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