अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था का बिगड़ा हाल,महंगाई 66%,ठप पड़े कारोबार


अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था का बिगड़ा हाल,महंगाई 66%,ठप पड़े कारोबार

मनोज बिसारिया | 29 Aug 2026

 

नई दिल्ली।अमेरिका के साथ जारी जंग और अमेरिकी प्रतिबंधों का असर अब ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है।ईरान के सर्वोच्च नेता ने सरकार से बढ़ती आर्थिक और आजीविका संबंधी परेशानियों से निपटने के लिए कहा है, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बताया कि अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के कारण देश का विदेशी व्यापार करीब 35% घट गया है।इस बीच ईरान में सालाना महंगाई दर पिछले महीने 66% तक पहुंच गई।

अमेरिका और ईरान के बीच जंग को लगभग छह महीने हो चुके हैं,बातचीत भी गतिरोध में 

अमेरिका और ईरान के बीच जंग को लगभग छह महीने हो चुके हैं और बातचीत भी गतिरोध में है।इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है।अमेरिका ने दूसरे देशों को ईरान के साथ कारोबारी संबंध कम करने की चेतावनी दी है और ऐसा नहीं करने पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की बात कही है।हालांकि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने चीन और भारत जैसे ईरान के बड़े व्यापारिक साझेदारों पर फिलहाल प्रतिबंध लगाने से परहेज किया है,ऐसे देशों पर कार्रवाई का असर अमेरिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के साथ कारोबार करने के मामले में मिस्र के Banque Misr पर प्रतिबंध लगाया

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के साथ कारोबार करने के मामले में मिस्र के Banque Misr पर प्रतिबंध लगाया है। इसके तहत संयुक्त अरब अमीरात स्थित बैंक की शाखाओं के अमेरिकी डॉलर में होने वाले लेनदेन पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।मिस्र के केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह और विदेश मंत्रालय इस मामले में अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं,उसके मुताबिक यह कदम Banque Misr UAE के अमेरिकी डॉलर वाले उन लेनदेन तक सीमित है जो कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकों के जरिए होते हैं।अमेरिकी ट्रेजरी अधिकारियों ने हांगकांग स्थित एक इकाई और ईरान के Bank Melli से जुड़े एक व्यक्ति पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।

महंगाई और रोजगार को लेकर चिंता

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने सरकार से आर्थिक मुश्किलों पर गंभीरता से काम करने के लिए कहा है।खामेने‌ई के हवाले से जारी एक लिखित बयान में महंगाई, बेरोजगारी, कीमतों के प्रबंधन और वस्तुओं एवं सेवाओं के बाजार से जुड़ी समस्याओं से निपटने की जरूरत बताई गई।

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सरकारी मीडिया से ये कहा

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सरकारी मीडिया से कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान के निर्यात और आयात में करीब 35% की गिरावट आई है।उन्होंने कहा कि जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के दौरान ईरान करीब 9 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेचने में सफल रहा था,उस समय अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति दी थी। बता दें कि विदेशी व्यापार में गिरावट के आकंड़े में मुख्य बात ये है कि जंग से पहले से ही ईरान का विदेशी व्यापार गंभीर मुश्किलों और दबाव का सामना कर रहा था,जिसमें अब और गिरावट आई है।

आम लोगों की स्थिति बिगड़ी

दुनिया भर की प्रमुख मीडिया में आ रही जानकारी के मुताबिक ईरान में रहने वाले आम लोगों की स्थिति और बिगड़ी है,कारोबार ठप पड़ने से रोजगार काफी घटे हैं।कुल मिलाकर जंग का सबसे बुरा असर आम लोगों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक लोगों के लिए फल जैसे खाने के सामान लग्जरी हो चुके हैं,रोजमर्रा का सामान भी लोगों को कार्ड के जरिए किस्तों पर सामान लेना पड़ा रहा है,क्योंकि महंगाई बढ़ने और आय घटने से वो एक साथ रकम चुकाने की स्थिति में नहीं है।

होर्मुज को लेकर तनाव है बरकरार

अमेरिका के आर्थिक दबाव के बीच जंग खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं।कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने गुरुवार को तेहरान में ईरानी नेताओं से मुलाकात की।उन्होंने जंग से पहले की स्थिति बहाल करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सामान्य आवाजाही फिर शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया।ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कतर के प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत को रचनात्मक बताया। बता दें कि कतर और पाकिस्तान ने जून में अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते में मध्यस्थता में भूमिका निभाई थी,इसी समझौते के बाद कुछ समय के लिए युद्धविराम हुआ था, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मतभेदों के कारण यह फिर टूट गया।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का ये कहना है

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से उन समुद्री सुरंगों को हटा दिया है,जिन्हें ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कई महीने पहले बिछाया था।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि जलडमरूमध्य खुला है,हालांकि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बिना ईरान की अनुमति के जहाजों के लिए यह रास्ता बंद है।

शुक्रवार को जारी शुरुआती शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक...

शुक्रवार को जारी शुरुआती शिपिंग आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को सिर्फ 7 कमोडिटी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे,इससे एक दिन पहले यह संख्या 17 थी, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत लगभग 15 जहाज प्रतिदिन रहा है,इससे इस रणनीतिक जलमार्ग में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता का अंदाजा लगाया जा सकता है।


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