जो कल तक थे जमींदार,अब हुए भूमिहीन,अब कागजों में बची उनके नाम जमीन,सरयू की कटान से भारी तबाही


जो कल तक थे जमींदार,अब हुए भूमिहीन,अब कागजों में बची उनके नाम जमीन,सरयू की कटान से भारी तबाही

धनंजय सिंह | 02 Sep 2026

 

बाराबंकी।उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरयू नदी की बाढ़ से नुकसान का आंकड़ा जब से रखा जाने लगा तब से 22 गांव बरबाद हो गए।सरयू ने इन गांवों को अपनी आगोश में ले लिया।यहां के रहने वाले लोग आसपास के गांवों में रहते हैं।

रामसनेहीघाट तहसील का गुनौली गांव ऐसे ही बरबादी की श्रेणी में आने वाला है।बीते तीन साल से सरयू पहले गांव की जमीन अब गांवों के घर और खेती करने वाली जमीन दोनों निगल रही है।गुनौली गांव के कई जमींदार अब भूमिहीन हो गए।अब सिर्फ कागजों पर उनके नाम जमीन बची है।

बीते तीन साल में दो हजार बीघा से ज्यादा खेती‌ करने वाली जमीन कट गई।गुनौली के प्रधान राम अभिलाख के परिवार की 50 बीघा जमीन इस बार ही कट चुकी है। इससे पहले भी कटान में शेष जमीन कट गई।अब वह कागजी जमींदार बचे हैं। प्रधान ने बताया कि जिस गति से कटान हो रही है,उसे देखते हुए अगले साल तक यह गांव भी गैर आबाद घोषित हो सकता है।

इसी साल गोमती व जगराम का पक्का मकान और 20 बीघा खेत नदी में कट गया।निरहू,अन्नी,बाबादीन,अयोध्या,परसू,गोट्टी,ननके के छप्पर वाले घर जहां थे,वह जमीन भी कट गई और इनके खेत भी करीब 50 बीघा कट गए।बीते 15 दिन में करीब 150 बीघा जमीन कट चुकी है।क्षेत्र के पत्रा,मल्दहा व गढ़ी गैर आबाद हो चुके हैं।मल्हदा की बची जमीन इस बार भी कट रही है।रामराज रावत के घर के निकट तक नदी की धारा पहुंच चुकी है।बांसगांव में पांच हजार बीघा खेत जलमग्न हैं। इनमें धान, गन्ना व चरी लगी है। चरी और धान सड़ने लगा है।

सूरतगंज ब्लाक के केदारीपुर,बबुरी गांव और नचना में बीते साल करीब पांच सौ बीघा जमीन कटी थी।यह तीनों गांव भी उजड़ गए।बाढ़ के बाद ग्रामीण नदी के किनारे छप्पर रखे थे, एक हफ्ते से फिर कटान जारी है।

जिन गांवों में फसलें बर्बाद हुई हैं या जमीन और घर कटे हैं, उनका सर्वे चल रहा है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सहायता दी जाएगी।

-निरंकार सिंह, एडीएम, बाराबंकी


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