नई दिल्ली।मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतें फिर ऊपर चढ़ रही हैं।ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है और बाजार की नजर 110 डॉलर पर है।आम तौर पर जंग या बड़े वैश्विक संकट के समय निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले सोने की तरफ जाते हैं।ऐसे में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद रहती है,लेकिन इस बार तस्वीर उलटी है।कच्चा तेल महंगा हो रहा है और सोना दबाव में है।
हाजिर सोना मंगलवार को 4,270 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसला
हाजिर सोना मंगलवार को 4,270 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गया।एक दिन पहले भी सोने में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी और कीमत एक महीने के निचले स्तर 4,250 डॉलर के आसपास पहुंच गयी थी। चांदी भी लगभग 62.7 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है।सवाल है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद सोना क्यों नहीं चढ़ रहा है। इसका जवाब अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड,महंगाई की चिंता और फेडरल रिजर्व से जुड़ी उम्मीदों में छिपा है।
महंगा तेल सोने को खींच रहा नीचे
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला के मुताबिक सोने पर बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर का दबाव है।पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं।इससे अमेरिका में महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने की चिंता बढ़ गई है।यानी इस समय एक दिलचस्प सिलसिला बन गया है।कच्चा तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का डर है।महंगाई की चिंता से बाजार मान रहा है कि अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रह सकती हैं। इससे बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है और इसका नुकसान सोने को हो रहा है।
अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 5 फीसदी के पार निकलकर करीब 5.04 फीसदी पहुंच गई है, जो 2007 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। 30 साल के बॉन्ड की यील्ड भी करीब 5.4 फीसदी तक पहुंच गई है।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोना क्यों गिरता है
सोना निवेशक को ब्याज नहीं देता।वहीं सरकारी बॉन्ड पर तय कमाई मिलती है। ऐसे में जब बॉन्ड से मिलने वाली कमाई बढ़ती है तो कुछ निवेशकों के लिए सोने के मुकाबले बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं।इसे आसान उदाहरण से समझें। अगर कम जोखिम वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड से निवेशक को 5 फीसदी के आसपास कमाई मिल रही है तो बिना ब्याज देने वाले सोने को रखने की लागत बढ़ जाती है। इसी वजह से ऊंची बॉन्ड यील्ड आम तौर पर सोने के लिए अच्छी नहीं मानी जाती।कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी भी कहते हैं कि मौजूदा गिरावट के पीछे यही गणित काम कर रहा है। तेल महंगा होने से महंगाई की उम्मीद बढ़ती है, इससे बॉन्ड यील्ड ऊपर जाती है और फिर सोने-चांदी पर दबाव आता है।
अब सबसे बड़ी नजर फेड पर
सोने के लिए अगला बड़ा फैसला अमेरिकी फेडरल रिजर्व का है।बाजार में इस समय करीब 90 फीसदी संभावना लगाई जा रही है कि फेड ब्याज दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह 2023 के बाद पहली ब्याज दर बढ़ोतरी होगी।हालांकि निवेशकों की नजर सिर्फ ब्याज दर के फैसले पर नहीं रहेगी। फेड आगे ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है, यह ज्यादा अहम होगा। फेड के नए अनुमान और ब्याज दरों को लेकर उसके अधिकारियों की राय से पता चलेगा कि आने वाले महीनों में और बढ़ोतरी हो सकती है या नहीं।अगर फेड का रुख सख्त रहता है और आगे भी ब्याज दर बढ़ाने के संकेत मिलते हैं तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं उम्मीद से नरम संकेत मिलने पर सोने को राहत मिल सकती है।
फिर युद्ध का फायदा सोने को क्यों नहीं मिल रहा
आमतौर पर युद्ध,राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता सोने की मांग बढ़ाते हैं। यही वजह है कि सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है। मिडिल ईस्ट का मौजूदा संकट भी सोने के लिए सहारा बन सकता था,लेकिन फिलहाल ब्याज दर और बॉन्ड यील्ड का असर युद्ध से मिलने वाले सहारे पर भारी पड़ रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो मिडिल ईस्ट का संकट सोने को ऊपर खींचने की कोशिश कर रहा है,लेकिन उसी संकट से महंगा हुआ तेल बॉन्ड यील्ड बढ़ाकर सोने को नीचे धकेल रहा है।यही वजह है कि एक ही संकट का कच्चे तेल और सोने पर फिलहाल बिल्कुल अलग असर दिखाई दे रहा है।
कच्चे तेल में बनी हुई है तेजी
कच्चे तेल की कहानी सीधे सप्लाई और उसे दुनिया तक पहुंचाने वाले रास्तों से जुड़ी है। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद है।यह पाइपलाइन इसलिए बेहद अहम है क्योंकि इसके जरिए सऊदी अरब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे बिना लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक तेल पहुंचा सकता है।इसके साथ होर्मुज और बाब-अल-मंदेब के आसपास भी खतरा बना हुआ है। इससे तेल टैंकरों की आवाजाही, बीमा और माल ढुलाई की लागत बढ़ने का डर है।
कायनात चैनवाला के मुताबिक बाजार अब केवल तेल की सप्लाई घटने का जोखिम नहीं देख रहा है। चिंता इस बात की भी है कि तेल भेजने के वैकल्पिक रास्ते कम हो रहे हैं। जब तक तनाव कम करने के लिए कोई भरोसेमंद समझौता सामने नहीं आता, कच्चे तेल की कीमतों में अतिरिक्त जोखिम बना रह सकता है।
आगे सोने और कच्चे तेल में कहां रखें नजर
अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक सोने के लिए करीब 4,200 डॉलर अहम सहारा है,जबकि 4,400 डॉलर के आसपास रुकावट है। फिलहाल सोना इसी दायरे में फंसा दिखाई दे रहा है। 4,400 डॉलर के ऊपर निकलने पर तेजी मजबूत हो सकती है।चांदी के लिए 62 से 65 डॉलर का दायरा अहम है। 62 डॉलर के नीचे जाने पर भाव 61 डॉलर तक आ सकता है, जबकि 65 डॉलर के ऊपर निकलने पर 67 डॉलर का रास्ता खुल सकता है।कच्चे तेल में तस्वीर फिलहाल अलग है। ब्रेंट के लिए 100 से 102 डॉलर का स्तर बड़ा सहारा माना जा रहा है। इसके ऊपर बने रहने तक रुख ऊपर की तरफ रह सकता है। आगे 110 डॉलर, फिर 115 डॉलर और उसके बाद 120 डॉलर अहम स्तर हो सकते हैं।इसलिए सोने के निवेशकों के लिए अगले कुछ दिन बेहद अहम हैं।केवल पश्चिम एशिया में क्या हो रहा है, यह देखना काफी नहीं होगा। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर और फेड का रुख मिलकर तय करेंगे कि सोना 4,200 डॉलर की तरफ जाता है या फिर 4,400 डॉलर के ऊपर वापसी करता है।