नई दिल्ली।सरकार डिजिटल पेमेंट के सबसे बड़े माध्यम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर बड़े ट्रांजैक्शन के लिए चार्ज लगाने की तैयारी कर रही है।मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक देश की पेमेंट अथॉरिटी मंगलवार को बैंकों और पेमेंट कंपनियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है। बैठक में बड़े ट्रांजैक्शन पर कितना चार्ज लगाया जाए और उससे मिलने वाली रकम को बैंकों,पेमेंट ऐप और दूसरी कंपनियों के बीच किस तरह बांटा जाए,इस पर बात हो रही है।यह चर्चा ऐसे समय हो रही है,जब भारत ने सोमवार को पेमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है।नए नियमों के तहत अब 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की इजाजत मिल गई है।अभी तक यूपीआई के जरिए होने वाले सभी पेमेंट पूरी तरह फ्री थे।
0.4% तक चार्ज लगाने पर विचार
सूत्रों के मुताबिक नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और भारतीय रिजर्व बैंक लगभग 0.4 फीसदी चार्ज लगाने के पक्ष में हैं।हालांकि अभी अंतिम चार्ज तय नहीं हुआ है। इस चार्ज से मिलने वाली रकम में बैंकों,पेमेंट ऐप और मर्चेंट पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर की हिस्सेदारी कितनी होगी,यह भी अभी तय होना बाकी है।
मामले से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक...
मामले से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक कुल चार्ज का 40 फीसदी हिस्सा बैंकों को मिल सकता है।बाकी पैसा पेमेंट ऐप और मर्चेंट पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच बराबर बांटे जाने की संभावना है।हालांकि हर तरह के यूपीआई पेमेंट पर चार्ज लगाने की योजना नहीं है।सूत्रों के मुताबिक दुकानदार या कारोबारी को किए जाने वाले पेमेंट यानी पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाया जा सकता है।वहीं दो लोगों के बीच होने वाले पीयर टू पीयर पेमेंट पहले की तरह फ्री रह सकते हैं।
अगस्त में हुए 24 अरब यूपीआई पेमेंट
भारत में डिजिटल पेमेंट का यूपीआई सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है।अगस्त में यूपीआई के जरिए करीब 24 अरब पेमेंट हुए,जिनकी कुल रकम लगभग 311 अरब डॉलर रही। बड़े ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने से बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए कमाई का एक नया जरिया खुल सकता है।
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के एक्सपर्ट्स ये है अनुमान
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस चार्ज से पेमेंट इंडस्ट्री को हर साल 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।इस बदलाव का फायदा पेटीएम और पाइन लैब्स जैसी कंपनियों को मिल सकता है।इससे बैंकों की कमाई का एक नया रास्ता भी खुल सकता है। वहीं आईपीओ की तैयारी कर रही फोनपे और रोजरपे के कारोबार की संभावनाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।भारत के यूपीआई मार्केट में वॉलमार्ड समर्थित फोनपेट,अल्फाबेट की गूगल पे,पेटीएम और मेटा की CRED जैसे बड़े पेमेंट ऐप हैं। इनमें कई कंपनियों को विदेशी निवेश भी मिला हुआ है।