भोपाल।हीरों के खान के लिए जाना जाने वाला पन्ना शहर एक बार फिर सुर्खियों में है।मध्य प्रदेश की रत्नगर्भा कही जाने वाली इस धरती के मझगवां में 27.29 कैरेट का जेम क्वालिटी का हीरा निकला है।इसकी अनुमानित कीमत लगभग दो करोड़ बताई जा रही है।
पन्ना में जमीन के नीचे से निकला एक बेशकीमती पत्थर अब करोड़ों की बोली का कर रहा इंतजार
पन्ना में जमीन के नीचे से निकला एक बेशकीमती पत्थर अब करोड़ों की बोली का इंतजार कर रहा है।मझगवां की खदान से निकला 27.29 कैरेट का जेम क्वालिटी हीरा इन दिनों चर्चा में है।शुरुआती अनुमान के मुताबिक इसकी कीमत लगभग दो करोड़ रुपये हो सकती है।हालांकि हीरे की असली कीमत उसकी नीलामी में लगने वाली बोली से ही तय होगी।दिलचस्प बात ये है कि ये सिर्फ एक और हीरा नहीं है।मार्च 2024 में दोबारा खनन शुरू होने के बाद NMDC की मझगवां परियोजना से मिला ये सबसे बड़ा जेम क्वालिटी हीरा है।यानी जिस खदान से लगातार हीरे निकाले जा रहे हैं, वहां अब तक मिले जेम क्वालिटी के हीरों में इसका आकार सबसे बड़ा है।
पहले समझिए जेम क्वालिटी का हीरा क्या होता है
हर प्राकृतिक हीरा एक जैसा नहीं होता,उसकी गुणवत्ता,रंग, पारदर्शिता और दूसरे गुणों के आधार पर उसका इस्तेमाल तय होता है।जेम क्वालिटी के हीरे आभूषणों में इस्तेमाल किए जाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।मझगवां की खदान से मिला 27.29 कैरेट का हीरा इसी कैटेगरी का है,इससे पहले इसी साल जुलाई में यहां से 13.16 कैरेट का जेम क्वालिटी हीरा मिला था।NMDC के आंकड़ों के मुताबिक 2024 में दोबारा खनन शुरू होने के बाद अब तक परियोजना से करीब 14 हजार कैरेट हीरे निकाले जा चुके हैं।
पन्ना की खदान क्यों है खास
पन्ना का नाम भारत में हीरा खनन से लंबे समय से जुड़ा हुआ है।यहां संगठित तरीके से हीरा उत्पादन की शुरुआत 1960 के दशक में हुई। 1967 में संगठित उत्पादन की शुरुआत के बाद 1971-72 से यहां सुव्यवस्थित उत्पादन शुरू हुआ।मझगवां में NMDC की परियोजना को एशिया की इकलौती यंत्रीकृत हीरा खदान बताया जाता है।यहां प्राकृतिक हीरों का उत्पादन मशीनों और व्यवस्थित खनन प्रक्रिया के जरिए किया जाता है।हालांकि, पन्ना में हीरा मिलने की कहानी इससे भी पुरानी है। इस क्षेत्र में हीरा खनन का इतिहास लगभग 1675 ईस्वी तक जुड़ा माना जाता है।जिले की हीरा-धारित पट्टी की उथली खदानों से भी समय-समय पर बड़े और अच्छी गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरे मिलते रहे हैं।
हीरा मिल गया,लेकिन बिकेगा कब
27.29 कैरेट का हीरा मिलने के बाद अब नजर इसकी नीलामी पर है।पन्ना में आखिरी हीरा नीलामी फरवरी 2024 में हुई थी,इसके बाद अगली नीलामी का इंतजार लंबा होता गया है।हीरा कार्यालय में लगभग 80 हीरे रखे होने की जानकारी है,इनमें अलग-अलग आकार और गुणवत्ता के हीरे शामिल हैं।
मार्च 2026 में हीरा कार्यालय और NMDC की संयुक्त नीलामी छतरपुर में कराने की योजना थी,लेकिन इसे टाल दिया गया।अधिकारियों ने नीलामी में देरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी जिक्र किया है।रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी जैसी परिस्थितियों का असर हीरा बाजार पर पड़ने की बात कही गई है।
अक्टूबर में खुल सकता है नीलामी का रास्ता
अब उम्मीद अक्टूबर की नीलामी से है।हीरा कार्यालय के हीरा पारखी अनुपम सिंह के मुताबिक अक्टूबर में नीलामी कराने की कोशिश की जा रही है।पन्ना की हीरा नीलामी सिर्फ स्थानीय कारोबार तक सीमित नहीं रहती।महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हैदराबाद समेत कई राज्यों से कारोबारी यहां पहुंचते हैं।नीलामी में खरीदे गए हीरों को आगे तराशा जाता है और इसके बाद रूस,सऊदी अरब,संयुक्त अरब अमीरात समेत अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है।
ऐसे में 27.29 कैरेट का ये नया हीरा अब सिर्फ पन्ना की खदान की उपलब्धि नहीं,बल्कि अक्टूबर में होने वाली संभावित नीलामी का भी बड़ा आकर्षण बन सकता है। लगभग दो करोड़ रुपये का शुरुआती अनुमान है,लेकिन इसकी अंतिम कीमत कितनी होगी,इसका फैसला बोली लगने के बाद ही होगा।