नई दिल्ली।सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) अमीर बनने का कोई शॉर्टकट नहीं है। यह लंबी रेस का घोड़ा है,जहां मंजिल तक पहुंचने के लिए रफ्तार से ज्यादा टिके रहना जरूरी है।शुरुआती 2-3 साल में एसआईपी का रिटर्न कई बार खास नहीं दिखता।बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते कुछ अवधियों में इसका रिटर्न फिक्स्ड डिपॉजिट से भी कम नजर आ सकता है।
पिछले तीन दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है...
पिछले तीन दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि शुरुआती पांच साल में करीब 95 फीसदी आसआईपी निवेशकों ने ऐसा दौर देखा,जब रिटर्न उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।यही वह समय होता है,जब कई निवेशक अपनी एसआईपी बंद करने के बारे में सोचने लगते हैं या वास्तव में इसे रोक देते हैं,लेकिन डीएसपी म्युचुअल फंड की नेत्रा रिपोर्ट बताती है कि जो निवेशक ऐसे बुरे दौर में भी टिके रहते हैं, वे लंबी अवधि में दौलत बनाने में कामयाब हो सकते हैं।
एसआईपी में उतार-चढ़ाव भरा रहा सफर
डीएसपी म्युचुअल फंड ने सितंबर 1996 से अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर 10 साल की एसआईपी पर रिसर्च की। आंकड़े बताते हैं कि लंबी अवधि की एसआईपी में भी सफर हमेशा आसान नहीं रहा। करीब 81 फीसदी 10 साल की एसआईपी में निवेशकों को किसी न किसी दौर में नेगेटिव रिटर्न का सामना करना पड़ा। वहीं 97 फीसदी एसआईपी ऐसी रहीं,जिन्होंने सफर के अलग-अलग पड़ाव पर डेट निवेश से कम रिटर्न दिया।इतना ही नहीं मीडियन आधार पर एक एसआईपी ने 10 साल की पूरी अवधि में करीब 16 महीने तक डेट निवेश से कम रिटर्न दिया। यानी एसआईपी शुरू करने के बाद कुछ समय तक कमजोर रिटर्न मिलना असामान्य नहीं है। यही वह दौर है,जब निवेशक के धैर्य की असली परीक्षा होती है।
5 साल में 95% लोगों ने देखा बुरा दौर
अगर शुरुआती पांच साल की बात करें तो करीब 95 फीसदी एसआईपी निवेशकों ने इस दौरान बुरा दौर देखा।इतना ही नहीं छठे से दसवें साल के बीच भी करीब 60 फीसदी एसआईपी में एक और ऐसा दौर आया,जब निवेश जारी रखने के बजाय उसे रोक देना ज्यादा आसान फैसला लग सकता था।रिपोर्ट बताती है कि बुरे दौर में टिके रहने वाली लगभग सभी एसआईपी बाद में अपने शुरुआती रिटर्न स्तर तक पहुंच गईं। यानी बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान कमजोर प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि एसआईपी का सफर वहीं खत्म हो गया।एसआईपी उन बाजारों में बेहतर तरीके से काम करती है, जो लंबी अवधि में ऊपर बढ़ते हैं या गिरावट के बाद संभल जाते हैं। हालांकि अगर बाजार लंबे समय तक लगातार गिरता रहे, तो एसआईपी में भी नेगेटिव रिटर्न का जोखिम बना रहता है। ऐसे में जिन निवेशकों को लंबे समय में बाजार के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है, उनके लिए एसआईपी बाजार में नियमित तरीके से निवेश करने का एक रास्ता हो सकती है।
टिकने वाले निवेशकों ने बनाई दौलत
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 30 साल के दौरान सेंसेक्स टीआरआई में 10 साल की अवधि वाली 99 फीसदी एसआईपी ने डेट निवेश से बेहतर रिटर्न दिया। इन एसआईपी का मीडियन रिटर्न 14.2 फीसदी रहा। यानी लंबी अवधि में ज्यादातर एसआईपी ने डेट निवेश के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया।कुल मिलाकर एसआईपी में निवेश का असली फायदा लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने से मिलता है। बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान कमजोर रिटर्न देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। हालांकि एसआईपी में भी रिटर्न की गारंटी नहीं होती और निवेश का फैसला सोच-समझकर लेना जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के लिए है। म्युचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से राय जरूर लें।